विधान सभा चुनाव 2023, कर्नाटक की 224 सीटों पर वोटिंग आज: भाजपा सत्ता में वापसी कर 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ेगी या छोटी पार्टियां बनेंगीं किंगमेकर
न्यूज़ डेस्क :
कर्नाटक में एक महीने चले चुनाव प्रचार के बाद 224 सीटों के लिए आज सुबह 7 बजे से वोटिंग होगी। राज्य में 5.31 करोड़ वोटर और 2615 कैंडिडेट हैं। मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस के बीच है। नतीजे 13 मई को आएंगे।
इस बार भाजपा के लिए पीएम नरेंद्र मोदी समेत पार्टी के बड़े नेताओं ने साढ़े चार सौ से ज्यादा रैलियां कीं। 100 से ज्यादा रोड शो भी किए। खुद पीएम मोदी दो दिन कर्नाटक में रुके। वहीं, राहुल, प्रियंका और सोनिया ने 31 से ज्यादा सभाएं कीं।
चुनावी कैंपेन में कांग्रेस ने भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार और कमीशन पर फोकस रखा। वहीं, भाजपा ने बजरंगबली, बजरंग दल, आतंकवाद को मुद्दा बनाया। मोदी ने 19 में से 12 सभाओं में बजरंगबली का जिक्र किया।

कर्नाटक में राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बने 3 फैक्टर…
1. पिछले 5 चुनाव में 3 बार हंग असेंबली: कर्नाटक में पिछले 38 साल से हर 5 साल में सत्ता बदलती आ रही है। आखिरी बार 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व वाली जनता पार्टी ने सत्ता में रहते हुए चुनाव जीता था। वहीं, पिछले पांच चुनाव (1999, 2004, 2008, 2013 और 2018) में से सिर्फ दो बार ( 1999, 2013) सिंगल पार्टी को बहुमत मिला। भाजपा 2004, 2008, 2018 में सबसे बड़ी पार्टी बनी। उसने बाहरी सपोर्ट से सरकार बनाई।
अभी क्या स्थिति है: कोई भी पार्टी गठबंधन पर अपने पत्ते नहीं खोल रही हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जेडीएस ने भाजपा के साथ जाने की तैयारी की है। हालांकि जेडीएस ने किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है।
2. लिंगायत-वोक्कालिगा तय करेंगे नतीजे: राज्य में 17% लिंगायत वोटर हैं। 75-80 सीटों पर इनका असर है। आबादी में 14% हिस्सा रखने वाले वोक्कालिगा वोटर 50-55 सीटों पर असर रखते हैं। 9.5% कुरबा वोटर 25-30 सीटों के नतीजे बदल देते हैं। 32% एससी 30-35 सीटों पर और 17% मुस्लिम वोटर 35-40 सीटों के नतीजे तय करते हैं।
अभी क्या स्थिति है: पिछली बार जीते भाजपा के 104 विधायकों में से 49 विधायक लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय से हैं। इस बार भाजपा ने इन दोनों समुदायों से 109 कैंडिडेट्स उतारे हैं। SC कैटेगरी में भाजपा के 37, कांग्रेस के 35, जेडीएस के 31 कैंडिडेट्स हैं। कांग्रेस के 12 और जेडीएस के 23 उम्मीदवार मुस्लिम हैं, जबकि भाजपा ने किसी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया है।
3. छोटी पार्टियां और निर्दलीय चुनौती बने: कर्नाटक में सीधी टक्कर भाजपा और कांग्रेस के बीच है। तीसरी ताकत जेडीएस है। इस बार आम आदमी पार्टी, बसपा, उत्तम प्रजाकिया पार्टी, वामपंथी दल, कर्नाटक राष्ट्र समिति, कल्याण राज्य प्रगति पक्ष जैसे छोटे दलों ने भी प्रत्याशी उतारे हैं।
अभी क्या स्थिति है: भाजपा, कांग्रेस समेत जेडीएस को छोटी पार्टियों की तरफ से वोट कटने का डर है। इन पार्टियों ने एक से दस हजार तक वोट काट लिए तो रिजल्ट पर बड़ा असर हो सकता है। पिछले चुनाव में निर्दलीय समेत गैर-मान्यता प्राप्त दलों को 4.11 % वोट शेयर मिला था।
भाजपा-कांग्रेस के चुनावी कैंपेन को बयानों समझें…
1. भाजपा ने प्रचार के केंद्र में मोदी को रखा; बजरंग बली, सांप, आतंक पर फोकस: पीएम नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल से 6 मई के बीच यानी कैंपेन के आखिरी 8 दिन में 19 रैलियां और 6 रोड शो किए। दो दिन में 36 किमी लंबा रोड शो किया। भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने 206 पब्लिक रैलियां और 90 रोड-शो किए। राज्य के नेताओं ने 231 सभाएं और 48 रोड शो किए।
पीएम मोदी ने बजरंग दल बैन, बजरंगबली, केरल स्टोरी, लव जिहाद, 91 गालियां और जहरीला सांप कहे जाने पर कांग्रेस को घेरा। बाकी नेता भी तुष्टिकरण, मुस्लिम आरक्षण, आतंकवाद पर लगातार बोलते रहे।
2. सोनिया मैदान में उतरीं, राहुल ने 16 और प्रियंका ने 15 सभाएं कीं: कांग्रेस ने भी आखिरी 8 दिन पूरी ताकत से प्रचार किया। सोनिया गांधी ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व सीएम शेट्टार के समर्थन में सभा की। कांग्रेस के नेशनल और स्टेट लीडर्स ने 99 रैली और 33 रोड शो किए। राहुल ने 16 रैली और 2 रोड शो, जबकि प्रियंका ने 15 रैली और 10 रोड शो किए।
कांग्रेस की हर रैली में भाजपा सरकार के करप्शन का जिक्र हुआ। 40% कमीशन को लेकर सीएम से लेकर सरकारी मशीनरी पर निशाना साधा गया। स्थानीय मुद्दों के साथ अडानी का भी जिक्र हुआ।
2018 में भाजपा को बहुमत नहीं मिला… फिर भी सरकार बनाई
2018 में भाजपा ने 104, कांग्रेस ने 78 और JDS ने 37 सीटें जीती थीं। किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। भाजपा से येदियुरप्पा ने 17 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन सदन में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 23 मई को इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कांग्रेस-JDS की गठबंधन सरकार बनी।
इसके 14 महीने बाद कर्नाटक की सियासत ने फिर करवट ली। कांग्रेस और JDS के कुछ विधायकों की बगावत के बाद कुमारस्वामी को कुर्सी छोड़नी पड़ी। इन बागियों को येदियुरप्पा ने भाजपा में मिलाया और 26 जुलाई 2019 को 219 विधायकों के समर्थन के साथ वे फिर मुख्यमंत्री बने, लेकिन 2 साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। भाजपा ने बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया।



