भोपाल देश का पहला शहर: जहां स्लम में रहने वाले राष्ट्रीय औसत से दोगुने, आधा किलोमीटर तक पार्क नही
भोपाल डेस्क :
भोपाल में कहने के लिए प्रति व्यक्ति 125 वर्ग फीट जगह ओपन स्पेस और पार्क के लिए उपलब्ध है, लेकिन आबादी के असमान वितरण का नतीजा यह है कि 75 फीसदी आबादी ऐसी है जिनके घर से आधा किमी की दूरी पर कोई पार्क नहीं है। इतना ही नहीं भोपाल में शहर में 36% लोग स्लम में रह रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुना है। साल 2020 में सड़क दुर्घटनाओं में शहर में 68 लोग घायल हुए, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 28 है, यानी राजधानी में सड़क सुधार के भी क्षेत्र में काम करने की जरूरत है।
यह और ऐसी कई अन्य बातें यूनाइटेड नेशंस के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स- 2030 के तहत तैयार वाॅलंटरी लोकल रिव्यू(वीएलआर) में कही गई है। यह रिव्यू तैयार करने वाला भोपाल देश में पहला शहर है। यूनाइटेड नेशंस ने 2015 में शहरों के विकास का रोड मैप तैयार करने के लिए 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के साथ सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स – 2030 तैयार किया था। न्यूयाॅर्क दुनिया का पहला शहर था जिसने 2018 में वाॅलंटरी लोकल रिव्यू तैयार किया था। यूनाइटेड नेशंस के 193 सदस्य देशों में से 33 देशों के 114 शहर अब तक वीएलआर तैयार कर चुके हैं। भोपाल नगर निगम और यूएन हैबिटेट ने अन्य संबंधित अफसरों और एजेंसियों के सहयोग से भोपाल का वीएलआर तैयार किया है। यूएन हैबिटेट की कंट्री प्रोग्राम मैनेजर पारुल अग्रवाल ने कहा कि भोपाल देश के अन्य शहरों के लिए उदाहरण बनेगा।
डिजास्टर मैनेजमेंट में सुधार की जरूरत
- भोपाल में मास्टर प्लान को भी अपडेट करने की जरूरत है। टाउन प्लानर्स की संख्या भी बहुत कम है। 14 हजार की आबादी पर केवल 0.09 प्लानर है, जबकि इसे कम से कम 1 होना चाहिए।
- डिजास्टर मैनेजमेंट खास तौर से अतिवर्षा से निपटने के लिए प्लानिंग में सुधार की जरूरत है।
- वायु प्रदूषण के स्तर (पीएम 2.5 और पीएम 10) पर काम करने की जरूरत है, जो अब तक स्वीकार्य स्तर से अधिक है।
इस रिपोर्ट के आधार पर तय होगा 2030 तक का रोडमैप
यूएन हैबिटेट के लीड एक्सपर्ट और स्मार्ट सिटी कंपनी के चीफ प्लानर वीपी कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इसके जरिए शहर के 2030 तक के डेवलपमेंट का रोडमैप तैयार होगा। 2023 से 2030 तक टारगेट को पाने के लिए किस क्षेत्र में क्या कदम उठाने हैं, वह इसके जरिए तय हो सकेगा।
स्टार्ट अप बढ़ें और जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान आए
सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने, नए स्टार्ट अप और इन्कयूबेशन सेंटर खोलने और जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान लागू करने से शहर में समृद्धि आएगी। वीएलआर में केंद्र सरकार की परियोजनाओं स्मार्ट सिटी, अमृत और पीएम आवास योजना आदि के क्रियान्वयन से भी शहर डेवलप होगा।
कोरोना में उपयोगी साबित हुए पीएचसी और संजीवनी
कोरोना के समय प्राइमरी हेल्थ सेंटर और संजीवनी क्लीनिक का नेटवर्क खासा उपयोगी साबित हुआ। भोपाल में 20 पीएचसी हैं और 40 संजीवनी क्लीनिक हैं। यहां जांच और टीकाकरण आसानी से हो सका।



