प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग पर 22 करोड़ों की पेनाल्टी: अस्पतालों में दवा-उपकरण खरीदने जैसी स्कीम का पैसा सालभर उपयाेग ही नहीं किया
भोपाल डेस्क :
केंद्रीय योजनाओं में मोदी सरकार ने मप्र को करोड़ों रुपए भेजे, लेकिन खर्च करने की बजाए इस पैसे को विभागों ने बैंकों में रखा। इसका 272 करोड़ 50 लाख रुपए ब्याज बना, जो अब केंद्र को लौटाना होगा। अलग-अलग स्कीमों में जिस अनुपात में पैसा दिया गया, उसी अनुपात में पैसा वापस होगा।
हैरान करने वाला तथ्य यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी केंद्र की योजनाओं में 2021-22 में 622 करोड़ रुपए मिले, लेकिन इसे 2022-23 में निकाला गया। इस वजह से 22 करोड़ की पेनाल्टी भी लगी। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को ताकीद कर दी है कि केंद्र ने सभी योजनाओं में निगरानी बढ़ा दी है। इसलिए जब तक यूटिलिटी सर्टिफिकेट नहीं देंगे, पैसा नहीं आएगा। बैंकों में अनावश्यक राशि भी न रखी जाए। जो भी पैसा मप्र के विभागों द्वारा बैंकों में रखा गया था, उसका ब्याज 27 अप्रैल तक केंद्र सरकार को लौटाना होगा।

मरीजों की सेहत से खिलवाड़, स्वास्थ्य की इन योजनाओं में पैसा खर्च नहीं
स्वास्थ्य विभाग की जिन स्कीमों में पैसा खर्च नहीं हुआ, उनमें आयुष्मान भारत के अलावा नेशनल ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम शामिल है, जिससे दवाओं की व्यवस्था होती है। वहीं नेशनल हेल्थ प्रोग्राम के तहत हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंथनिग है। ये अस्पतालों में उपकरण खरीदी और सुविधाएं बढ़ाने की योजना है। गौरतलब है कि आयुष्मान योजना में प्रदेश में कई अस्पतालों का भुगतान प्रभावित हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग पर फिर पेनाल्टी तय
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में केंद्र की स्कीम में 1796 करोड़ रुपए 17 अगस्त 2022 को मिले, विभाग ने 92 दिन बाद पैसा निकाला। इससे 15.53 करोड़ रुपए ब्याज मिला। स्वास्थ्य विभाग को 2022-23 में 323 करोड़ रुपए मिले, जिसका अभी तक इस्तेमाल नहीं हुआ। इस बार फिर पेनाल्टी तय है।



