खरगोन में कागज की तरह उड़ा शादी का टेंट: देखते ही देखते 200 फीट ऊंचाई तक पहुंचा, जान बचाने इधर-उधर भागे लोग
न्यूज़ डेस्क :
खरगोन में एक शादी समारोह में इतनी तेज हवा चली कि 45 बाय 45 का टेंट सीलिंग पाइप के साथ कागज की तरह उड़ गया। टेंट बवंडर के साथ करीब 200 फीट ऊंचाई तक पहुंच गया। इस दौरान अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे। बवंडर का असर कम होने पर वह बिजली लाइन में आकर अटक गया। तेज आवाज के साथ पूरे क्षेत्र में बिजली गुल हो गई।
घटना झिरन्या क्षेत्र में कुसुंबिया गांव में गुरुवार की है। इसका वीडियो शुक्रवार को सामने आया। यहां तेरसिंह सुमाल की बेटी ज्योति का विवाह पिछोड़िया के रहने वाले राकेश से हो रहा था। शादी समारोह के लिए खेत में टेंट लगाया गया था। पास ही एक अन्य टेंट में विवाह की रस्में अदा की जा रही थी। दूसरे टेंट में मेहमाना खाना खा रहे थे।
खेत में आयोजित किया गया था शादी समारोह
मामला जिले के झिरन्या क्षेत्र में कुसुंबिया गांव का है। जहां गुरुवार को तेरसिंह सुमाल की बेटी ज्योति का विवाह पिछोड़िया के राकेश से हो रहा था। शादी समारोह के लिए टेंट खेत में लगाया गया था। खेत में ही लगे एक अन्य शामियाने में विवाह की रस्में अदा की जा रही थीं। दूसरे टेंट में मेहमान खाना खा रहे थे। इसी दौरान दोपहर करीब 2.30 बजे तेज हवा चलने लगी। अचानक बवंडर उठा और टेंट को ले उड़ा। शुक्रवार को इसका वीडियो सामने आया।
बिजली के तारों में अटका टेंट
दोहपर करीब 2.30 बजे तेज हवा चलने लगी। अचानक बवंडर उठा और टेंट को उड़ाकर ले गया। कुछ देर हवा में रहने के बाद टेंट बिजली के तारों में अटक गया। लोहे के पाइप बिजली के तार से जैसे ही टकराए, पूरे क्षेत्र में बिजली सप्लाई बंद हो गई। ग्रामीणों की सूचना पर कर्मचारियों ने ग्रिड से सप्लाई बंद की। घटना के दौरान वहां अफरा-तफरी का माहौल रहा। सहायक यंत्री एनके मोरे ने बताया कि मौके पर पहुंचकर लाइन को दुरुस्त किया गया। इसके बाद बिजली सप्लाई चालू की गई।
भोजन व्यवस्था बिगड़ी, मेहमानों ने दाल-चावल खाए
बवंडर ने विवाह की सभी व्यवस्थाएं बिगाड़ दी। खाना भी पूरी तरह खराब हो गया था। दुल्हन के भाई प्रकाश और दिनेश ने बताया कि बवंडर के शांत होने के बाद घर से दाल-चावल बुलवाए गए। बाजार से बूंदी लेकर आए। वहीं पकाकर मेहमानों को परोसे गए। ग्रामीणों ने मिलकर व्यवस्थाएं संभालीं। रमेश पटेल ने कहा, ‘गनीमत रही कि बवंडर गांव की ओर नहीं गया, वरना कच्चे और टीन शेड से बने घरों को नुकसान हो जाता।’



