मध्यप्रदेश

हेल्थ इंश्योरेंस में हम हर साल 2100 करोड़ का प्रीमियम दे रहे, पर 18% जीएसटी होने से सिर्फ 5% लोग ही पॉलिसी ले पा रहे: जीएसटी काउंसिल की बैठक आज

इंदौर डेस्क :

इंदौर डिवीजन के 8 जिलों से हर साल 2100 करोड़ रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भरा जाता है। इस पर सालाना लगभग 378 करोड़ रुपए का जीएसटी लगता है। शहर में सिर्फ 2 लाख लोग हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी ले पाते हैं, क्योंकि 18% जीएसटी लागू होने से प्रीमियम महंगा पड़ता है।

ऐसे में इसे सस्ता करने के लिए देशभर में हेल्थ इंश्योरेंस से जीएसटी हटाने की मांग उठ रही है। इंदौर ने भी इसका समर्थन किया है। जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक 9 सितंबर को है। इंदौर से पहले भी प्री-बजट मेमोरेंडम के माध्यम से और अब जीएसटी काउंसिल को रिकमंडेशन भी भेजे जा रहे हैं, कि हेल्थ इंश्योरेंस से जीएसटी को हटाया जाए। इसके पीछे बड़ा कारण है अत्यधिक प्रीमियम राशि।

21-22 में प्रीमियम टू क्लेम रेशो 109% था, 2023 में 89% हुआ

वरिष्ठ इंश्योरेंस एडवाइजर दीपक भूतड़ा ने बताया प्रीमियम ज्यादा क्यों है इसका एनालिसिस करें तो बीमा कंपनियों का क्लेम रेशो सामने आता है। 2021-22 में देशभर का प्रीमियम टू क्लेम रेशो 109% पर था, जिसमें से भी सरकारी कंपनियों का 126% और निजी कंपनियों का 105% था। 2022-23 में घटकर ये 89% हो गया। यानी बीमा कंपनियां भी मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। इसी वजह से बीमा पहले ही बहुत महंगा है, ऊपर से 18% जीएसटी की मार, जिसके कारण ये आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुका है। 2022-23 के आंकड़े ही इसी साल फरवरी में जारी हुए हैं। अभी 2023-24 के आंकड़े सामने ही नहीं आए हैं।

प्रीमियम महंगा होने से आम आदमी बीमा नहीं करवा पाता एक्सपर्ट टीपीए के मानद सचिव सीए अभय शर्मा और सीए इंस्टिट्यूट के रीजनल काउंसिल मेंबर सीए कीर्ति जोशी ने बताया कि देश में औसत सिर्फ 4% लोग ही हेल्थ इंश्योरेंस ले पाते हैं। इसमें आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं शामिल नहीं हैं। ऐसे में प्रीमियम महंगा होने से आम आदमी बीमा नहीं करवा पाता। जीएसटी खत्म हो तो ज्यादा लोग इस दायरे में आ सकेंगे। मध्यप्रदेश टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट एके लखोटिया ने बताया कि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक 9 सितंबर को है। इसमें जीएसटी दर कम होने की उम्मीद है।

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