दमोह में 2 महीने पहले स्थापित हुई प्रतिमाएं से जैन तीर्थ में प्रतिमाओं से निकल रहा पानी: जैन आचार्य मान रहे चमत्कार; एक्सपर्ट बोले- वाष्पीकरण से ऐसा संभव
न्यूज़ डेस्क :
मध्यप्रदेश के दमोह के पथरिया में बने विरागोदय जैन तीर्थ में स्थापित प्रतिमाओं से पानी रिस रहा है। इसे लोग और जैन संत चमत्कार मान रहे हैं। वहीं, पुरातत्व संग्रहालय के एक्सपर्ट का कहना है कि वाष्पीकरण के कारण ऐसा हो सकता है।
25 जनवरी को जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर धार्मिक महोत्सव हुआ था। इस दौरान 51 फीट ऊंचे बने मंदिर में प्रतिमाओं को प्राण प्रतिष्ठा के साथ सिंहासन पर स्थापित किया गया था। आयोजन को संपन्न कराने के लिए देशभर से सैकड़ों संत यहां पहुंचे थे। करीब एक सप्ताह पहले अचानक ही किसी भक्त ने प्रतिमाओं से पानी का रिसाव देखा। मंदिर की कई प्रतिमाओं से इसी तरह पानी का रिसाव हो रहा है। जैन श्रावकों कि ये चर्चा जैन मुनियों तक पहुंची।
आचार्य भी मान रहे चमत्कार
विरागोदय तीर्थ पथरिया में जन्मे जैन संत आचार्य विराग सागर महाराज के नाम पर बनाया गया है। वर्तमान में विराग सागर महाराज तीर्थ में मौजूद हैं। महोत्सव के समय उनका यहां आगमन हुआ था। प्रतिमाओं से निकल रहे पानी को लेकर उनका कहना है कि श्रद्धा और भक्ति जब लोगों के अंदर रहती है। उनके अनुसार जब कोई काम हो जाता है, तो वह अतिशय चमत्कार जैसा हो जाता है। यही नहीं, आचार्य विराग सागर महाराज इस तीर्थ के और भी कई चमत्कारों की चर्चा करते हैं। इसमें उन्होंने पंचकल्याणक महोत्सव में प्रतिमाओं की स्थापना के समय का एक चमत्कार का जिक्र भी किया।
उन्होंने बताया कि प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर का माली प्रतिमा को छू रहा था। वहां अचानक दो लड़के पहुंचे, जिन्होंने माली से कहा कि अब तुम प्रतिमाओं को स्पर्श नहीं कर सकते, लेकिन माली ने कहा- मैं तो भगवान का भक्त हूं, मैं तो स्पर्श करूंगा। इसके बाद माली प्रतिमाओं का पाद प्रक्षालन करने लगा। उसे फिर से आवाज आई। जब माली ने मुड़कर देखा, तो दोनों लड़के अदृश्य हो चुके थे। ये घटना माली ने अपनी मां को बताई थी। तब उसकी मां ने कहा था, प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रतिमाओं का स्पर्श नहीं करना चाहिए। आचार्य का कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान देवों का आह्वान करते हैं, इसलिए उनकी मौजूदगी संभव है।

प्रतिमाओं से पानी निकलना चमत्कार ही है
तीर्थ कमेटी के अध्यक्ष विपिन चौधरी भी इस घटना को चमत्कार मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के लिए देशभर से संत पहुंचे थे। विधि विधान के साथ प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। मंदिर की ऊंचाई और जहां प्रतिमाओं की स्थापना की गई है, वहां पानी पहुंच सके, ऐसी व्यवस्था नहीं है। अचानक प्रतिमाओं से पानी का रिसाव चमत्कार ही है। प्रतिमाओं के स्थापना के 15 दिन बाद ही पानी का रिसाव शुरू हो गया था। यह मंदिर 51 फीट ऊंचा है, इसके बाद भी प्रतिमाओं से पानी का रिसाव हो रहा है। यही कारण है कि हम इसे चमत्कार मान रहे हैं।
वाष्पीकरण के कारण निकल रहा पानी
दमोह जिला पुरातत्व संग्रहालय के एक्सपर्ट डॉ. सुरेंद्र चौरसिया का कहना है कि प्रतिमाओं से पानी निकलने का वैज्ञानिक कारण वाष्पीकरण हो सकता है। प्रतिमाओं को बनाने के बाद उनमें पॉलिश किया जाता है, जिस कारण से मौसम परिवर्तन यानी गर्मी शुरू होते ही पानी वाष्पीकरण के माध्यम से बाहर निकलने लगता है।
विराग सागर महाराज के सानिध्य में हुआ था महोत्सव
पंचकल्याणक महोत्सव में शामिल होने के लिए जैन संत विराग सागर महाराज 6 जनवरी को सुबह पथरिया नगर पहुंचे थे। इनका जन्म पथरिया में हुआ था। इनके नाम पर ही विरागोदय तीर्थ का निर्माण कराया गया है। नगर प्रवेश के दौरान जैन श्रावक जनसमूह ने उनकी भव्य अगवानी की। शहर के सभी प्रमुख मार्गों को फूल माला और तोरण द्वारों से सजाया गया था। संत की अगवानी करने के लिए सभी महिलाएं, पुरुष, बच्चे, बुजुर्ग शामिल हुए थे। ढोल नगाड़े और डीजे की धुन पर नाचते गाते लोग संत को विरागोदय तीर्थ तक लेकर पहुंचे थे। पथरिया नगर चौराहे पर बालिकाओं ने उनकी परिक्रमा कर अगवानी की थी।
21 साल बाद पथरिया में हुआ था गुरु शिष्य का मिलन
23 जनवरी को विराग सागर महाराज के शिष्य विनिश्चय सागर भी पथरिया पहुंचे थे। 21 साल बाद गुरु और शिष्य का मिलन हुआ था। मिलन के दृश्य को देखने के लिए नगर व जिले के अलावा देश भर के लोग पहुंचे थे। नगर में तोरण द्वार लगाकर भव्य अगवानी की गई थी।
गुरु के नाम पर बने तीर्थ में गुरुकुल, आश्रम और अस्पताल बनेंगे
विनिश्चय सागर महाराज के गुरु विराग सागर महाराज के सम्मान में बने विशाल विरागोदय तीर्थ में आश्रम, स्कूल, अस्पताल और गुरुकुल रहेगा। 4 एकड़ में बन रहा यह धार्मिक स्थल भव्य है। कमल आकार में बना तीर्थ देखने में भी सुंदर है। यहां भगवान धर्मनाथ की प्रतिमा स्थापित की गई है।
गुरु के माता पिता ले चुके हैं समाधि
गुरु विराग सागर महाराज के माता पिता ने भी दीक्षा लेने के बाद समाधि ली है। इनके एक भाई भी दीक्षित हुए हैं। दो भाई फिलहाल ग्रस्त जीवन में जो वर्तमान में पथरिया में रहते हैं। एक भाई सुरेंद्र ऑटो पार्ट्स की दुकान संचालित करते हैं और दूसरे भाई विजय गारमेंट्स की दुकान संचालित करते हैं। गुरु विराग सागर महाराज ने कक्षा 11वीं में ही दीक्षा ले ली थी। उसी समय वो जैन संतों से प्रभावित हुए और कटनी में उन्होंने दीक्षा ली थी। उसके बाद से उनका तपो जीवन लगातार चलता जा रहा है।



