अनोखी परंपरा: विदिशा के कालादेव में दशहरे पर होगा पत्थर मार युद्ध:- राम की सेना पर रावण की सेना फेंकेगी गोफान से पत्थर

आनंदपुर डेस्क : सीताराम वाघेला
विदिशा जिला मुख्यालय से करीब 150 दूर लटेरी तहसील के कालादेव गांव में मंगलवार को दशहरे के मौके पर राम और रावण की सेना के बीच अनोखा युद्ध होगा। कालादेव गांव में गोफन मार युद्ध होगा। इसमें कालादेव के स्थानीय लोग राम दल में शमिल होते हैं और आसपास के गोफन चलाने वनवासी, भील एवं बंजारा जाति के लोग रावण दल में शामिल होकर पत्थर बरसाते हैं। इन लोगों का निशाना अचूक होता। ये गोफन में पत्थर रखकर चलाते हैं लेकिन एक भी पत्थर राम दल के व्यक्ति को नहीं लगता है। और रामदल के व्यक्ति निश्चित हो कर बीच मैदान में लगे राम ध्याज की परिक्रमा करते रहते हैं। इस नजारे को देखने विदिशा, गुना, राजगढ़ सहित अनेक जिला के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। एक तरह से कालादेव गांव में गोटमार मेले की तर्ज पर जंग होती है।

लड़ाई के पीछे यह है मान्यता
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि वर्षों पूर्व टोंक रियासत के नवाब ने इस दशहरे को रुकवाने का पूरा प्रयास किया था। उन्होंने कहा था कि यह दशहरा नहीं होना चाहिए क्योंकि आप लोग जानबूझकर किसी को पत्थर नहीं मारते हैं। लेकिन हम गोली चलाएंगे। यदि राम की सेना के सैनिक को गोली लग गई तो यह दशहरा आज से ही बंद हो जाएगा। भगवान राम की ऐसी कृपा बनी की नवाब की गोली भी किसी राम सैनिक को नहीं छू पाई। तब से ही यह दशहरा अभी तक लगातार चल रहा है। पास ही कल्याण देव जी के मंदिर के पास 5 जीयत समाधियां भी हैं।

8 दिन से हर दिन पहले से बीनते है पत्थर
भील बंजारा समुदाय के लोग बताते हैं कि काला देव में पत्थर मार युद्ध के लिए जवान लड़के 8 दिन पहले से गोल पत्थर इकट्ठा करते हैं और एक पत्थरबाज गोफान से पांच राउंड में लगभग 5 से 8 किलोमीटर बरसाते है। जिनमें में एक पत्थर का वजन लगभग 200 ग्राम तक होता है जिस स्थान से पत्थर बरसाए हैं वहां से राम ध्वज की दूरी लगभग 200 फीट होती हैं।

कालादेव के पंडित रामेश्वर शर्मा बताते हैं कि सर्वप्रथम ग्राम के पटेल ध्वज और चादर लेकर पीर बाबा के स्थान पर ग्रामीण जनों के साथ जाकर सबसे पहले पूजा अर्चना करते हैं इसके बाद ठाकुर जी के मंदिर में भगवान से अनुमति लेकर ही राम रावण की सेवा के बीच अंतर मार्ग दशहरी का आयोजन किया जाता है।

रावण की प्रतिमा का जीर्णुद्धार भी हमने कराया हैं जगह-जगह से महाराजा रावण की प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई देखने में जी अच्छी नहीं लग रही थी। महाराजा रावण की प्रतिमा लगभग 20 से 21 फीट ऊंची है।





