जयपुर

राजस्थान में लाचार स्वस्थ सिस्टम अस्पताल के बाहर खुले में हुई महिला की डिलीवरी: परिजनों ने डॉक्टर्स पर लगाया लापरवाही का आरोप

जयपुर डेस्क :

अजमेर के पास केकड़ी में राजकीय जिला अस्पताल में चिकित्सा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। लापरवाही के चलते एक गर्भवती महिला का खुले में अस्पताल के बाहर प्रसव कराना पड़ा है। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की है। कमेटी को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।

गर्भवती महिला के साथ आए कादेड़ा रोड निवासी उसके ससुर दुर्गालाल प्रजापत ने बताया- गुरुवार सुबह 6 बजे वो बहू अनिता को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। उस समय अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी मौजूद थे। जब ऑन कॉल ड्यूटी पर तैनात डॉ. मीनाक्षी धाकड़ से पूछा कि वे कितनी देर में अस्पताल पहुंचेगी तो उन्होंने कहा कि उन्हें अस्पताल आने में समय लगेगा।

इसके बाद वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने महिला को देखकर सीरियस स्थिति बताते हुए अजमेर रेफर कर दिया। रेफर करने के बाद गर्भवती महिला के परिजन एक घंटे तक अस्पताल के बाहर ही एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे। कुछ देर बाद गर्भवती महिला अस्पताल के बाहर ही प्रसव पीड़ा से कराहने लगी।

प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से स्ट्रेचर की मांग की ताकि महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया जा सके। प्रशासन ने स्ट्रेचर भी उपलब्ध नहीं करवाया। महिला की प्रसव पीड़ा तेज होने के बाद वहां मौजूद महिलाओं ने मदद की और चारों तरफ साड़ी लगाकर खुले में ही महिला का प्रसव कराया। महिला ने बच्ची को जन्म दिया।

चिकित्सा कर्मियों पर लापरवाही का आरोप

प्रसव के बाद काफी देर तक भी महिला और नवजात की चिकित्सा विभाग ने सुध नहीं ली। जिसके चलते गर्भवती महिला और नवजात धूप में तड़पते रहे। बाद में मामला बढ़ने पर जच्चा और बच्ची को अस्पताल में भर्ती किया गया।

परिजनों ने आरोप लगाया कि जब गर्भवती की नॉर्मल डिलीवरी हुई है तो उसके बावजूद भी चिकित्सा स्टाफ ने गंभीर स्थिति मानते हुए रेफर क्यों किया है। घटना के बाद परिजनों में रोष है।

गर्भवती महिला अनीता प्रजापत का विकलांग पति मनोज एक मिठाई की दुकान पर काम करता है। अभी अनिता राजकीय अस्पताल के गायनिक वार्ड में भर्ती है। वहीं उसकी बच्ची अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती है। अनीता के पति मनोज प्रजापत ने बताया- पिछले साल भी 8 अप्रैल 2022 को उसके पत्नी के डिलीवरी हुई थी। उस समय भी अस्पताल प्रशासन ने उसकी पत्नी को रेफर किया था, लेकिन काफी मिन्नतें करने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसकी पत्नी को अस्पताल में भर्ती किया उसके बाद एक बच्चे का जन्म हुआ था, लेकिन 3 दिन बाद ही बच्चे की मृत्यु हो गई थी। इस बार भी बच्ची हुई है, लेकिन उसकी फिलहाल स्थिति ठीक नहीं होने से आईसीयू में भर्ती है।

मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन ने बनाई कमेटी

इधर मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में मामले को लेकर ऑन ड्यूटी नर्सिंगकर्मियों, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और गार्ड को तुरंत हटा दिया है। पीएमओ डॉ. गणपतराज पूरी ने बताया कि मामले को लेकर एक कमेटी गठित की है। कमेटी को तीन दिन के भीतर मामले में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही लापरवाही बरतने वाले चिकित्सा कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रही बाद स्ट्रेचर की तो अस्पताल में स्ट्रेचर मौजूद था। वहां क्यों नहीं ले जाया गया इसकी जांच की जा रही है।

इधर घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्व चिकित्सा मंत्री व केकड़ी विधायक डॉ रघु शर्मा ने केकड़ी के जिला अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पीएमओ डॉ गणपत राजपुरी को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए हैं। बिलाल दो चिकित्सा कार्मिकों के सस्पेंड करने की बात सामने आ रही है।

पीएमओ ने ली बैठक

इधर घटना को गंभीरता से लेते हुए पीएमओ डॉ. गणपत राजपुरी ने चिकित्सा कार्मिकों की एक बैठक भी ली है। बैठक में मामले को लेकर चर्चा की गई।

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