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दूल्हे ने 13 दिन मंडप में किया इंतजार: सेहरा-शेरवानी पहने बैठा रहा, पिता प्रेमी के साथ गई बेटी को गुजरात से लाया तब हुए फेरे

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पाली में एक अनूठी शादी हुई, यहां दूल्हे को फेरों के लिए 13 दिन तक मंडप में इंतजार करना पड़ा। कारण था कि जिस लड़की से रिश्ता तय हुआ था, वह अपने नाबालिग प्रेमी के साथ फरार हो गई थी।

1700 किलोमीटर दूर से आए दूल्हे को जब इस बात का पता चला तो वह भी जिद पर अड़ गया कि बिना शादी के तो गांव से जाएगा नहीं। इसी जिद की वजह से वह सेहरा और शेरवानी पहने लड़की के घर बारातियों के साथ बैठ गया।

इधर, दूल्हे की जिद देख बेटी के पिता ने भी बताया कि वह बेटी को चाहे पाताल से ढूंढकर लाएगा, लेकिन लाएगा जरूर।

आखिर 13 दिन बाद जब दुल्हन लौटी तो दोनों ने साथ फेरे लिए।

आखिर इन 13 दिनों से पहले ऐसा क्या हुआ, जिसकी वजह से दूल्हन को ये कदम उठाना पड़ा। पहली बार बेटी के पिता सखाराम ने बताई पूरी घटना…

मैं पाली जिले के बाली ब्लॉक के सेणा गांव का रहने वाला हूं। 3 मई को मेरी बेटी की शादी सिरोही के कैलाश नगर के पास मणाद गांव के रहने वाले युवक के साथ होनी थी।

23 अप्रैल को मेरी 25 साल की बड़ी बेटी की शादी का लग्न लिखाने गए थे और, इसी के 20 दिन बाद 3 मई को मेरी बेटी की शादी की तारीख तय हो गई थी। परिवार वाले खुश थे। घर में शादी का माहौल था। पत्नी की दोनों किडनी खराब हैं। उसकी भी इच्छा भी कि उसकी आंखों के सामने बेटी की शादी हो जाए।

घर में करीब 7 दिन पहले ही सारे फंक्शन शुरू हो गए थे। पूरा परिवार मेरे घर आया हुआ था। बेटी भी शादी के हर कार्यक्रम में खुश होकर हिस्सा ले रही थी। 2 मई की रात बेटी की बिंदौली निकाली गई। बेटी ने उस दौरान खूब डांस किया। शादी में भी 300 बाराती आने में ही थे। बेटी की खुशी देख लगा ही नहीं था कि अगले दिन हमारे साथ क्या होने वाला है। उसने भी अहसास नहीं होने दिया कि वह फेरों से पहले बड़ा कदम उठा लेगी।

सुबह 7 बजे फेरों का मुहूर्त था

3 मई को सुबह 7 बजे शादी के फेरों का मुहूर्त था। 300 बारातियों के स्वागत के लिए हमनें पूरी तैयारी कर रखी थी। बारात सुबह जल्दी पहुंच गई थी।

सुबह करीब 6 बजकर 15 मिनट पर बेटी ने घरवालों को बताया कि उसके पेट में दर्द हो रहा है। एक बार वह टॉयलेट जाकर आना चाहती है। इसके लिए वह घर के पीछे की तरफ चली गई।

यहीं पर एक लड़का (दूर के रिश्ते का भाई) बाइक लेकर खड़ा था। बेटी उसके साथ रवाना हो गई। काफी देर तक वह नहीं लौटी तो सांडेराव (पाली) से आई उसकी मौसी उसे संभालने गई कि कहीं तबीयत ज्यादा खराब न हो गई हो। बेटी ने घर के पीछे जहां जाने का बोला था, वहां जब नहीं मिली तो सभी के होश उड़ गए।

पंडित मंडप में बुलाने का कहते रहे, लेकिन वो नहीं मिली

फेरों का समय हो गया था। पंडित जी ने दूल्हे को मंडप में बैठा लिया था। सभी लोग इंतजार करने लगे कि दुल्हन अभी तक आई नहीं। इस पर हम लोगों ने बताया कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है और कुछ देर रुकने को कहा। इधर, हम लोग बेटी को ढूंढने में लग गए। काफी देर बाद नहीं मिली तो पंडित बार-बार दुल्हन को बुलाने का कहने लगे।

मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि कैसे बताऊं कि बेटी फरार हो गई और मिल नहीं रही है। लेकिन, जब माहौल थोड़ा गर्म होने लगा तो मैंने बता दिया कि बेटी भाग गई है और वह अब नहीं मिल रही है। इतना सुनते ही सारे बाराती भड़क गए और हमें ताने मारने लगे।

दूल्हा नाराज हो गया

इधर, बेटी के गायब होने की बात दूल्हे को पता चली तो एक बार वह भी भड़क गया और गुस्सा होने लगा। मुझे भी बुरा लगा क्योंकि दूल्हे और उसके परिवार की तो कोई गलती नहीं थी। इस पर मैंने उससे वादा किया कि ‘चाहे जमीन हो या आसमान, चाहे घर बिक जाए या जमीन, बेटी को आपके साथ शादी करवाकर भेजूंगा, आप इंतजार करो। इसके बाद दोपहर 12 बजे नाणा थाने में दुल्हन की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करवाकर दुल्हन की तलाश शुरू की गई।

दूल्हे ने ससुर की बात का रखा सम्मान

मामला इतना बढ़ गया था कि बात मेरी इज्जत पर आ गई। घर पर आई बारात को मैं कैसे जाने देता। दूल्हे को जब भरोसा दिलाया कि उसकी शादी बेटी मनीषा से ही होगी तो वह थोड़ा शांत हुआ और मेरी बात भी मान ली।

मैंने दूल्हे के पिता को हाथ जोड़ कहा कि आप सभी बाराती यहां रुको। इसके बाद दूल्हे और पूरे परिवार ने मेरे यहां डेरा डाला और सभी के रुकने की व्यवस्था की। दूल्हे के साथ 50 बाराती आए थे, इनमें से 25 लौट गए और बाकी मेरे घर पर ही थे।

नाबालिग प्रेमी के साथ गई थी, गुजरात में रिश्तेदार के यहां मिली

बेटी को दोबारा ढूंढने का वादा करने के बाद मैंने पुलिस और गांववालों के साथ बेटी की तलाशी शुरू की। इस दौरान सिरोही के पिंडवाड़ा, सरूपगंज, आबूरोड और पाली जिले के आस-पास गांवों में तलाश ली। इसी बीच पुलिस ने जब नाबालिग के घर पहुंची तो वह भी गायब मिला। पुलिस को यकीन हो गया था कि दुल्हन इसी नाबालिग के साथ है। इस पर उसके मोबाइल नंबर से लोकेशन ट्रेस की। यहां पता चला कि वह गुजरात के विसनगर में है। पुलिस यहां पहुंची तो दुल्हन अपने नाबालिग प्रेमी की बुआ के यहां मिली। यहां से पुलिस उसे डिटेन कर 15 मई को पाली जिले के नाणा थाने में लेकर आई।

नाणा थाने में लड़की ने अपने बयान में घरवालों के साथ जाने की इच्छा जताई और नाबालिग को बेकसूर बताया। इसके बाद 16 मई को धूमधाम से शादी हुई।

दुल्हन 10वीं तक पढ़ी हुई है। वहीं, दूल्हा आंध्र प्रदेश में मिठाई की दुकान पर काम करता है, जो शादी तय होने के बाद गांव आया था।

मां के इलाज के दौरान रिश्तेदार से प्रेम, साथ में हुई फरार

पुलिस ने जब मामले की पड़ताल और पूछताछ की तो सामने आया कि दुल्हन की मां की दोनों किडनी खराब है। इसका उदयपुर में इलाज चल रहा था और वहां डायलासिस होता था। पिता जब भी उदयपुर डायलासिस करवाने जाते तो वे अपने मामा के पोते को कहकर जाते। ताकि घर में कोई काम हो तो बेटियों को परेशानी न हो। इसी दौरान नाबालिग और बेटी के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि जब ये रिश्ता तय हुआ तो बेटी ने शादी भी करने से मना कर दिया था। पत्नी की हालात को देख पिता ने रिश्ता कर दिया। हालांकि जब गुजरात से दुल्हन को लेकर पहुंचे तो दूल्हे के साथ शादी करने के लिए राजी हो गई।

दूल्हा बोला- सोच रहा था दोस्त क्या कहेंगे

दूल्हे का कहना है कि घरवालों ने जब मुझे बताया कि तेरी शादी तय कर दी है और 3 मई को फेरे होने हैं तो मैं गांव आ गया। शादी के लिए मैं 1700 किलोमीटर दूर से पूरी तैयारी कर आया था। 23 अप्रैल को मैंने लग्न की माला पहन ली थी। बारात में मेरे रिश्तेदार और दोस्त भी थे। लेकिन, जब मुझे पता चला कि मेरी होने वाली पत्नी किसी और के साथ भाग गई है तो मुझे बहुत बुरा लगा और गुस्सा भी आया। फिर सोचने लगा कि बिना शादी के गांव में जाऊंगा तो पड़ोसी और दोस्त क्या कहेंगे। वे मेरी कहीं हंसी-मजाक न बना दे।

एक बार माला डालने के बाद उतारते नहीं है, इसलिए सेहरा पहन रखा

दूल्हे ने बताया कि लग्न के जब माला गले में डाल दी थी और सेहरा जब पहन लिया था तो फेरों के बाद ही उतरता है। मैं मंडप मैं बैठ दूल्हन का इंतजार कर रहा था। लेकिन, जब पूरी घटना पता चली तो मैंने सेहरा नहीं उतारा और नही शादी में पहने कपड़े। जब टाइम लगने लगा तो कपड़ों को अंदर रख दिया। इस बीच जब पता चला कि दुल्हन मिल गई है तो शादी के कपड़े पहन तैयार हुआ।

लेकिन, मैं करता क्या ? क्योंकि ससुर जी ने वादा कर लिया था और हमारी भी जिद थी इसलिए हम वहीं डेरा डाल बैठ गए। बस घर में इधर-उधर घूमते थे। गांव में जा नहीं सकते थे। क्योंकि डर लगता था कि गांव के लोग देखकर क्या कहेंगे।

13 दिन में 35 हजार का खाना और नाश्ता

दुल्हन के पिता के कहने पर दूल्हे और उसके मां-बाप समेत 25 बाराती मौके पर ही रुके रहे।

पहले दिन हलवाई ने खाना बनाया। इसके बाद दोनों पक्ष ही घर में खाना बनाने लगे। दोनों परिवार के घर की महिलाएं सभी लोगों के लिए खाने की व्यवस्था करती। इस दौरान करीब 35 हजार रुपए का खर्च आया।

दूल्हे ने बताया कि मेरे ससुर जी ने जो वादा किया था उसे पूरा किया और इस बात की उन्हें बहुत ज्यादा खुशी है।

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