हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर भोपाल में प्रदेश कांग्रेस ने प्रदर्शन: दो विधायक वाटर कैनन के प्रेशर से गिरे

भोपाल डेस्क :
अडाणी-हिंडनबर्ग मामले की जेपीसी जांच और SEBI चीफ के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस आज देशभर में प्रदर्शन किया। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। इस दौरान बैरिकेड पर चढ़ने का प्रयास कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने वाटर कैनन चलाई। इस दौरान पानी के प्रेशर से दो विधायक नीचे गिर गए।
अरेरा हिल्स स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कार्यालय पर प्रदर्शन करने जा रहे कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर रोक लिया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और महेश परमार ने बैरिकेड पर चढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने वाटर कैनन का प्रयोग कर रोका। वहीं श्योपुर के विधायक बाबू जंडेल को पुलिस ने बेरीकेड से हाथ पकड़कर नीचे उतार दिया।
इससे पहले कांग्रेस कार्यकर्ता मंजीरे बजाते हुए कार्यालय से निकले और व्यापमं चौराहे पर पहुंचे। यहां सभा हुई। सभा को प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया।

कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन को लेकर ये कहा
- भंवर जितेंद्र सिंह, प्रदेश प्रभारी, एमपी कांग्रेस : हिंडनबर्ग रिपोर्ट में अडाणी का नाम लिया जा रहा है। इस चेहरे के नकाब के पीछे मोदी की सरकार छिपी हुई है। मप्र में जल जीवन मिशन में पानी का बड़ा घोटाला हुआ है। जिसमें ये बातें की जा रही थीं कि हम हर गरीब को पानी पिलाएंगे। उस पानी पर इन लोगों ने कमीशन खाया है।
- जीतू पटवारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष: एक PM ने नारा दिया था ना खाऊंगा न खाने दूंगा। लेकिन हालात क्या बने 20 प्रतिशत लोगों के पास देश की 80 प्रतिशत संपत्ति चली गई। 10 साल में गरीबों की डबल संख्या हो गई। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट दो बार सार्वजनिक हुई। एक बार 20 हजार करोड़ रुपए सेल कंपनियों के माध्यम से अडाणी के शेयर मार्केट में हेरा फेरी हुई। रिपोर्ट आने के बाद शेयर धड़ाम से नीचे गिर गया।
- अजय सिंह राहुल भैया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष: ये वही अडाणी जी हैं जिनके प्रदेश में आजकल घर-घर बिजली के मीटर लग रहे हैं। हमारे विंध्य अंचल में ये हालत है कि कोयला खदान उनकी, पावर प्रोजेक्ट उनका है। आदिवासी भाइयों की जमीन भले डूब जाए लेकिन अडाणी जी का काम चलता रहे। उनके लिए हमारे प्रधानमंत्री विशेष रुचि लेते हैं।


राहुल बोले- घोटाले की जांच करने वाले ही घोटाले में शामिल
राहुल गांधी ने 11 अगस्त को कहा था कि अडाणी महाघोटाले की जांच SEBI को दी गई। अब खबर है कि SEBI की चीफ माधवी बुच भी अडानी महाघोटाले में शामिल हैं। मतलब घोटाले की जांच करने वाला ही घोटाले में शामिल है।


हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट की बड़ी बातें
- अडाणी ग्रुप पर हमारी रिपोर्ट के लगभग 18 महीने हो चुके हैं। रिपोर्ट में इस बात के पुख्ता सबूत पेश किए गए थे कि अडाणी ग्रुप कॉर्पोरेट इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला कर रहा था।
- हमारी रिपोर्ट ने ऑफशोर, मुख्य रूप से मॉरीशस बेस्ड शेल एंटिटीज के एक जाल को उजागर किया था। जिनका इस्तेमाल संदिग्ध अरबों डॉलर के अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन, अनडिस्क्लोज्ड इन्वेस्टमेंट और स्टॉक मैनिपुलेशन के लिए किया गया था।
- सभी सबूतों के अलावा 40 से ज्यादा इंडिपेंडेंट मीडिया इन्वेस्टिगेशन ने हमारी रिपोर्ट की पुष्टि थी। इसके बावजूद सेबी ने अडाणी ग्रुप के खिलाफ कोई पब्लिक एक्शन नहीं लिया।
- जुलाई 2024 में सेबी ने हमें कारण बताओ नोटिस भेजा था। जिसके जवाब में हमने लिखा था कि हमें यह अजीब लगा कि कैसे सेबी को एक रेगुलेटर होने के बावजूद फ्रॉड प्रैक्टिसेस को बचाने के लिए सेट-अप किया गया था।
- सेबी ने फ्रॉड प्रैक्टिसेस से जुड़ी पार्टियों की जांच करने में बहुत कम रुचि दिखाई। यह लोग पब्लिक कंपनियों के जरिए अरबों डॉलर के अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शंस में लगे हुए एक सीक्रेट ऑफशोर शेल एम्पायर को चलाते थे। इसके अलावा नकली निवेश एंटिटीज के एक नेटवर्क के जरिए अपने शेयरों को बढ़ाते थे।
- ‘IPE प्लस फंड’ एक छोटा ऑफशोर मॉरीशस फंड है, जिसे अडाणी डायरेक्टर ने इंडिया इंफोलाइन (IIFL) के जरिए स्थापित किया है, जो वायरकार्ड स्कैंडल से जुड़ी एक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म है।
- गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी ने इस स्ट्रक्चर का यूज इंडियन मार्केट्स में निवेश करने के लिए किया, जिसमें अडाणी ग्रुप को पावर इक्विपमेंट्स के ओवर इनवॉइसिंग से मिला फंड शामिल था।
- सेबी चीफ और उनके पति धवल बुच की अस्पष्ट ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंड में हिस्सेदारी थी। विनोद अडाणी ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंड का यूज भी स्ट्रक्चर की तरह करते थे।
- डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, माधबी बुच और उनके पति धवल बुच ने पहली बार 5 जून 2015 को सिंगापुर में IPE प्लस फंड-1 में अपना अकाउंड ओपन किया था।



