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वीरांगना रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस पर निकाली शोभायात्रा, रानी अवंती बाई की सजीव झांकी ने मन मोहा

सिरोंज डेस्क :

सिरोंज में रविवार को रानी अवंती बाई लोधी का बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर शोभायात्रा निकाली गई। रानी का बलिदान दिवस 20 मार्च को जयंती थी, लेकिन जिले के अलग-अलग शहरों में अलग-अलग तारीख में शोभायात्रा निकाली गई, ताकि सब लोग शामिल हो सकें।

अखिल भारतीय लोधी/लोध क्षत्रिय महासभा के मार्गदर्शन में अनंतश्री गार्डन से करीब 11 बजे शोभायात्रा प्रारंभ हुई और करीब 2 बजे वापस गार्डन पहुंच कर शोभायात्रा का समापन हुआ। शहर के मुख्य बाजार व मार्गों पर अनेक जगह इस शोभायात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कोक सिंह नरवरिया, राष्ट्रीय महासचिव प्रीतम सिंह लोधी सहित इस शोभायात्रा में जिलेभर से लोधी समाज के लोग एकत्र हुए।

महान क्रांतिकारी रानी अवंती बाई लोधी

रानी अवंती बाई को प्रथम महिला शहीद होने का गौरव हासिल है। अवंती बाई का विवाह रामगढ़ के युवराज विक्रमादित्य से हुआ था। 1850 में रामगढ़ नरेश लक्ष्मण सिंह का निधन हुआ और विक्रमादित्य राजा बने। मगर राजा विक्रमादित्य का ध्यान राजकाज में कम और धार्मिक गतिविधियों में ज्यादा था। तब रानी अवंती बाई ने रामगढ़ का राजकाज अपने हाथ मे ले लिया।

कुछ समय बाद विक्रमादित्य का देहावसान हो गया। तब गवर्नर वेलिंग्टन ने रामगढ़ पर कब्जा करने सैनिक दबाव बना दिया। रानी अवंती बाई ने साहस पूर्वक झुकने से मना कर दिया और अंग्रेज सेना से युद्ध कर रामगढ़ से खदेड़ दिया।

अपनी तलवार से काट ली थी गर्दन

इस समय 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम चल रहा था। रानी ने मंडला के गोंड राजा शंकर शाह के साथ मिलकर आसपास के रजवाड़ों को एकत्र कर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। मगर युद्ध के दौरान शंकर शाह को अंग्रेजों ने मार दिया। उसके बाद रानी अवंती बाई ने रामगढ़ ओर मंडला दोनों रियासतों की सुरक्षा अपने कंधों पर ले ली। रानी ने अंग्रेजों ओर उनके समर्थकों से कई युद्ध लड़े। 20 मार्च 1858 को जब रानी को अंग्रेज सेना ने घेर लिया तो स्वाभिमानी रानी अवंती बाई ने अपनी गरदन खुद ही काट ली।

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