मध्यप्रदेश

पीएम सूर्य घर बिजली योजना: मध्यप्रदेश में 4.91 लाख रजिस्ट्रेशन, लेकिन 1168 सोलर संयंत्र ही इंस्टॉल हो सके

भोपाल डेस्क :

देश में 28 फरवरी को शुरू हुई पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मप्र में नए कनेक्शन अटक गए हैं। महीनेभर से नेशनल पोर्टल तकनीकी उलझनों के कारण काम नहीं कर रहा है। इस पर अलग-अलग 11 तरह की गड़बड़ियों के कारण न उपभोक्ता अपने घर में सोलर संयंत्र लगवा पा रहे हैं और न ही वेंडर उन्हें ये सुविधा दे पा रहे हैं। नतीजा ये है कि मप्र में 4,91,793 रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी अब तक केवल 1,168 सोलर संयंत्र ही इंस्टॉल हो पाए हैं। यह इसलिए, क्योंकि हमारे पास संयत्र लगाने के लिए सिर्फ 276 वेंडर ही उपलब्ध हैं।

नेशनल सोलर पोर्टल पर ये आ रही मुख्य परेशानियां

1. पोर्टल एक महीने में 24 में से औसतन 5-6 घंटे ही चल पा रहा है, वो भी रात के वक्त। 2. कोई उपभोक्ता सोलर संयंत्र लगवाने के लिए आईवीआरएस नंबर डालता है तो उसके नाम पते की बजाय पोर्टल दूसरे की जानकारी आ रही है। 3. उपभोक्ता ने एंट्री गलत भर दी है तो एडिट नहीं कर सकता। इससे आवेदन अमान्य हो रहा है। 4. वेंडर रजिस्ट्रेशन अटक रहे हैं। कोई नया वेंडर नहीं जुड़ रहा। 5. पोर्टल पर एमआईएस जनरेट करने पर भी डेटा दिख रहा है। 6. सोलर संयंत्र में पहले बिजली कंपनी के अलग अलग डिविजन की पेंडेंसी अलग दिखती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। 7. उपभोक्ता वेंडर बदलना चाहें या खुद आवेदन निरस्त करना चाहें तो कंपनी को डिलीट ऑप्शन पोर्टल में नहीं मिल रहा। 8. कई मामलों में आवेदन के बाद उपभोक्ता को न तो स्वीकृत भार नजर आ रहा है और न ही संयंत्र की क्षमता की जानकारी। तारीख भी है। 9. जिन उपभोक्ताओं के संयंत्र कमीशन हो चुके हैं, उन्हें आचार संहिता के कारण सब्सिडी की राशि नहीं मिल पा रही है। 10. पोर्टल से फिलहाल बैंकर्स भी परेशान हैं। सूर्य घर योजना में करीब 7% की ब्याज दर से लोन देने का प्रावधान है। पोर्टल पर वे लोन डिस्बरसल की प्रगति नहीं देख पा रहे हैं। 11. कई उपभोक्ताओं के आवेदन के विरुद्ध फिजिबिलिटी रिजेक्टेड का खुद से ही रिमार्क शो हो रहा है। बिजली कंपनी चाहकर भी इसे ठीक नहीं कर पा रही है।

गुजरात-यूपी हमसे आगे
क्षेत्रफल में सबसे बड़ा प्रदेश होने के बाद भी गुजरात, यूपी और महाराष्ट्र जैसे राज्य उपभोक्ताओं को वेंडर मुहैया करवाने में मप्र से कहीं आगे हैं।
ये पोर्टल मिनिस्ट्री ऑफ नॉन रिन्युएबल एनर्जी (एमएनआरई), दिल्ली संचालित करता है। मप्र विद्युत वितरण कंपनी के अफसरों ने इन तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए एमएनआरई को कई पत्र लिखे, लेकिन स्थिति वैसी ही है। यही वजह है कि आए दिन इसे लेकर शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। अब इस परेशानी को दूर करने के लिए अस्थाई तौर पर ऑफलाइन समाधान निकालने की तैयारी की जा रही है।

हम देश में पांचवें राज्य :
बिजली कंपनियों में हुए रजिस्ट्रेशन को पहले आवेदन में फिर उन्हें सोलर संयंत्र के इंस्टॉलेशन में हम देश के पांचवें राज्य हैं। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि मप्र में 4.91 लाख रजिस्ट्रेशन हुए, लेकिन फीस जमा कर आवेदन करने वालों की संख्या केवल 15,276 ही है। इनमें भी सोलर संयंत्र केवल 1,168 लोग ही इंस्टॉल करवा पाए हैं। सीजीएम एनसीई, मध्य क्षेत्र विद्युत कंपनी सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में सबसे आगे गुजरात है। यहां सोलर संयंत्र लगाने की संख्या 19% है। पुडुचेरी, केरला और पंजाब 13, 12 और 9 फीसदी के साथ दूसरे, तीसरे और चौथे पायदान पर हैं। 8% के साथ मप्र ऐसा करने वाला देश का पांचवां राज्य है।

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