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तिरस्कार भरी नजरों से देखते हैं लोग, एक किन्नर के स्कूल की कहानी: अदिति शर्मा को मांगना पसंद नहीं था तो खोल लिया स्कूल

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हरियाणा के जिले करनाल की किन्नर अदिति शर्मा को मांगना बिल्कुल भी पसंद नहीं था, इसलिए उसने अपना एक अलग रास्ता बनाया और शिक्षा के माध्यम से अपनी एक अलग पहचान बनाई। एक छोटा सा स्कूल खोला और बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत की, धीरे धीरे बच्चों की भी संख्या बढ़ती गई और आज किन्नर अदिति शर्मा के स्कूल में 50 बच्चे पढ़ते है।

सिर्फ 50 बच्चों की संख्या पढ़कर आप भी हैरान होंगे लेकिन ये सच है। बच्चों की संख्या कम होने का कारण यह है कि अदिति शर्मा एक किन्नर है और कुछ रूढ़िवादी सोच के लोग एक किन्नर के स्कूल में शायद अपने बच्चो को भेजना पसंद नहीं करते। लेकिन कुछ पॉजिटिव सोच के लोग भी है जो अपने बच्चों को अदिति के स्कूल में भेजकर खुश है। अदिति भी पूरी मेहनत और निष्ठा के साथ बच्चो को पढ़ाती है।

दिल्ली की रहने वाली है अदिति

अदिति शर्मा मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली है। लेकिन वह कई सालों से करनाल में रह रही है। अदिति को दूसरे किन्नरों की तरह मांग कर पेट भरना पसंद नहीं था, लिहाजा उसने स्कूल खोलने का फैसला लिया। हालांकि शुरुआती दौर में परेशानियां जरूर आई लेकिन उसने उन परेशानियों के आगे कभी हार नही मानी।

9 माह की बच्ची भी है अदिति की?

अदिति एक किन्नर है लेकिन उसके पास एक 9 माह की बच्ची भी है। अदिति ने इस बच्चे को गोद लिया हुआ है और वह भी अस्पताल से, क्योंकि इस बच्ची के मां बाप इसको रखना नहीं चाहते थे। वह सिर्फ अपनी ही नही बल्कि दूसरे बच्चों का भी ध्यान रखती है। वह कोई हिंदी मीडियम नही बल्कि इंग्लिश मीडियम स्कूल चला रही है।जिसमे बच्चों को अच्छी तरह से शिक्षा देती है।

तिरस्कार भरी नजरों से देखते है लोग

किन्नर होकर अदिति एक इंग्लिश मीडियम स्कूल चला रही है। जब उसने स्कूल खोला था तो लोगों की कई तरह की बातें सुनने को मिली। कुछ लोग आज भी उसे तिरस्कार भरी नजरों से देखते है। लेकिन उसे लोगों की कोई परवाह नही उसने जो लक्ष्य लिया है वह उस पर अडिग है। हालांकि उसके पास कोई फोर्थ क्लास कर्मचारी तक नही है लेकिन फिर भी वह टॉयलेट की सफाई खुद करती है। इस स्कूल में गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते है। ओर इन गरीब परिवारों के बच्चों को वह उड़ान देने का काम कर रही है ।

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