मध्यप्रदेश

मां और तीन बच्चों के सिंध नदी में कूदकर सुसाइड करने की: 2 घंटे साथ बैठे…और नदी में कूद गए मां-3 बच्चे, बेटी ने सेल्फी-फोटो क्लिक कीं

ग्वालियर डेस्क :

ग्वालियर के डबरा में मां और तीन बच्चों के सिंध नदी में कूदकर सुसाइड करने की वजह गृह क्लेश है। कोई अंदाजा नहीं लगा सका कि परिवार किस कदर तनाव में था। सामूहिक सुसाइड से पहले पूरे परिवार ने धूमेश्वर धाम पर भगवान शिव के दर्शन किए। सिंध नदी के झरने के पास 2 घंटे तक साथ बैठे रहे।

छोटी बेटी ने मोबाइल को फ्लाइट मोड पर डालकर आखिरी सेल्फी ली। इसके बाद मोबाइल बैग में छोड़कर खुदकुशी कर ली। इन सभी पॉइंट की पुष्टि सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, छात्रा के मोबाइल के रिकॉर्ड से हुई।

महिला ने सुसाइड नोट में लिखा, ‘पति बीजेपी का कार्यकर्ता होने पर हमें धमकी देता है कि मेरा कोई कुछ नहीं कर पाएगा। मायके से पैसे लेकर आने के लिए मारपीट करता है।’

कल्याणी गांव की रहने वाली ममता (47), बेटी अंशु उर्फ भावना (21), भूमिका उर्फ भूमि (17) और बेटे किट्टू जाटव (14) ने सुसाइड कर लिया था। 15 अक्टूबर से सभी लापता थे। 16 अक्टूबर को सिंध नदी किनारे बैग में सुसाइड नोट मिला था।

दोपहर 3.30 बजे मंदिर में दर्शन किए, शाम 5.17 बजे ली सेल्फी तीनों बच्चों और उनकी मां के शव सिंध नदी में मिलने के बाद जब पुलिस ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। धूमेश्वर मंदिर के मुख्य गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना वाले दिन दोपहर 3.30 बजे ममता और उनकी बेटियां धूमेश्वर धाम मंदिर की सीढ़ियों से दर्शन कर उतरती दिखीं।

सिंध नदी किनारे मिले बैग से भूमि का मोबाइल मिला। उसने शाम 5.17 बजे आखिरी सेल्फी क्लिक की। कुछ फोटो धूमेश्वर मंदिर के सामने नदी किनारे झरने के हैं। मोबाइल के स्क्रीन शॉट में मोबाइल फ्लाइट मोड पर नजर आ रहा है। मतलब मोबाइल नेटवर्क को बंद कर रखा था, जिससे उनकी लोकेशन पुलिस या परिवार तक नहीं पहुंच सके।

चुनरी यात्रा की भीड़ में समझ नहीं आए परिवार के इरादे धूमेश्वर धाम महादेव मंदिर से 15 अक्टूबर को रतनगढ़ माता मंदिर से होते हुए दंदरौआ धाम तक पैदल चुनरी यात्रा निकाली गई थी। इस वजह से यहां लोगों की काफी भीड़ थी। इसी दौरान कल्याणी गांव से ममता अपने बच्चों को लेकर ग्वालियर जाने की कह कर निकलीं। चुनरी यात्रा निकल जाने के बाद दोपहर 3.30 बजे से पहले मंदिर में अंदर जाकर पूजा की। इसके बाद लास्ट लोकेशन 3.30 बजे झरने की तरफ जाते हुए दिखाई दी है। इसमे चारों साथ जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सुसाइड नोट के एक-एक शब्द में झलक रहा दर्द…

मैं ममता अपने तीनों बच्चों के साथ आत्महत्या करने जा रही हूं, क्योंकि मेरे पति रोज-रोज हमें मरने के लिए मजबूर करते हैं। रोज मुझे, मेरी बेटियों को गालियां देता है। हसिया, फावड़ा, सरिया लेकर जान से मारने की धमकी देता है।

खुद को फांसी लगाकर मेरे और मेरे मायके वालों के नाम केस लगाने की धमकी देता है। रोज मुझे अपने मायके से पैसे लेकर आने के लिए मारपीट करता है। BJP का कार्यकर्ता होने पर हमें धमकी देता है कि मेरा कोई कुछ नहीं कर पाएगा और मैं तुम्हारे कर्म करवा दूंगा। कलेक्टर, एसपी मेरी कही हर झूठी बात को सही मानेंगे और कार्रवाई होगी। जैसा में कहूंगा, वैसा ही होगा, मेरा प्रशासन है।

घर का एक-एक सामान तोड़फोड़ दिया है। तीनों बच्चों को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। घर में कोई सामान नहीं लाता, किसी प्रकार का खर्चा नहीं दे रहा है। जैसे-तैसे छोटी सी दुकान से अपना खर्चा चला रहे हैं। उस दुकान के बाहर लाठी लेकर बैठ जाता है। ग्राहकों को सामान लेने के लिए नहीं आने देता है। हमारी आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि अपने बच्चों को पढ़ा भी नहीं पा रही हूं।

अतः में रोज-रोज के इस अपमान गाली खाने से मरने को मजबूर हूं। इतनी प्रताड़ना सहने में असमर्थ हूं। मेरी और बच्चों की मौत का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ राजेंद्र सिंह ही होगा। हमारे मरने के उपरांत मेरे बच्चों और मुझे न्याय दिलाएं।

अपनी मम्मी – पापा से क्षमा मांगती हूं कि बस अब सारी सहनशक्ति खत्म हो चुकी है। अपनी तरफ से मैंने हर संभव रिश्ते को निभाने की कोशिश की, पर अब नहीं। मेरे बच्चों को दुनिया में लाने का गुनाह मैंने किया है। इसलिए इन्हें में अपने साथ लेकर जा रही हूं।

मैं आप लोगों पर इनका कोई भी बोझ नहीं डाल सकती हूं, क्योंकि इनके बाप से उम्मीद खत्म हो गई है। वह इनकी क्या देखरेख करेगा, बल्कि उनकी जिंदगी भी मौत से बदतर बना देगा। रोज-रोज मरने के लिए मजबूर करने और बच्चों, लड़कियों को गालियां देने वाला उनकी देखरेख करेगा।’ (जैसा ममता ने सुसाइड नोट में लिखा)

22 साल पहले शादी ममता का मायका ग्वालियर में है। शादी 22 साल पहले हुई थी। ग्वालियर की कबीर कॉलोनी नदी पार टाल मुरार में रहने वाले ममता के पिता रामबाबू जाटव पीडब्ल्यूडी से हैं। दोनों भाई राकेश और हितेंद्र पुलिस में आरक्षक हैं।

दामाद की हरकतों की वजह से रामबाबू अपनी दोनों नातिनों को ग्वालियर ले आए थे। अपने घर के पास ही एक कमरा किराए से लेकर दोनों को पढ़ा रहे थे। बड़ी बेटी भावना नीट की तैयारी कर रही थी। भूमि 12वीं की छात्रा थी। बेटा किट्टू मां के साथ ही गांव में ही रहता था। दशहरे पर दोनों बेटियां ममता के पास गांव आईं थीं।

ममता के पिता ने बताया कि राजेंद्र शादी के बाद से ही परेशान कर रहा था। कई बार पुलिस में शिकायत भी की, लेकिन उसमें कोई सुधार नहीं आया। बेटी को गांव में ही किराने की दुकान भी खुलवा दी थी। कई बार राजेंद्र दुकान से भी ग्राहकों को भगा देता था। यह बात भी बेटी ने बताई थी।

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