भोपाल के 100 गांवों में अतिवृष्टि से फसल बर्बाद: खेतों में ही अंकुरित हो गई सोयाबीन, सर्वे की मांग

भोपाल डेस्क :
भोपाल के करीब 100 गांव में सोयाबीन की फसल अतिवृष्टि की वजह से बर्बाद हो गई है। कई जगह तो अभी भी खेतों में पानी भरा है। इससे सोयाबीन के दाने फिर से अंकुरित होने लगे हैं।
ऐसे में जनप्रतिनिधि खेतों में उतरकर सर्वे की मांग कर रहे हैं। बैरसिया इलाके में हालत ठीक नहीं है। यहां किसानों ने भी सर्वे की मांग उठाई है। विधायक विष्णु खत्री, जिपं सदस्य विनय मेहर ने कलेक्टर को सर्वे कराने के लिए पत्र लिखे हैं। विधायक खत्री ने बताया, उनकी बैरसिया विधानसभा के करीब 100 गांव में अतिवृष्टि की वजह से फसल के खराब होने जानकारी मिली है। किसान लगातार सर्वे कराए जाने की बात कह रहे हैं। इसलिए कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को पत्र लिखा है। ताकि, अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों का किसानों को मुआवजा मिल सके।

‘खेतों में पानी भरा, दाना अंकुरित हो गया’ जिला पंचायत सदस्य मेहर ने बताया, बैरसिया में अच्छी बारिश हुई है। इस वजह से सोयाबीन की फसल अतिवृष्टि की चपेट में आ गई। अभी भी सैकड़ों खेतों में पानी भरा है। इससे फसल 70% तक बर्बाद हो गई है। दाना अंकुरित हो गया है। जिसकी कीमत किसान को नहीं मिलेगी। खुद खेतों में पहुंचकर फसलों की स्थिति देखी है।
इन गांवों में ज्यादा असर खितवास, जूना पानी, बागापुरा, निदानपुर, चाटाहेड़ी बबचिया, तलैया शाह, बरखेड़ा याकूब, डूंगरिया, धतुरिया, दोहाया, सोहाया आदि गांवों में अतिवृष्टि का असर ज्यादा है।

ऐसे बर्बाद हुई फसल
जिपं सदस्य मेहर के अनुसार, जब खेतों में जाकर देखा तो कई खेतों में पानी भरा मिला। इस कारण किसान फसल की कटाई नहीं कर सके। यह फसल गल गई है। जिन खेतों में पानी नहीं है, वहां लगातार बारिश की वजह से सोयाबीन का दाना अंकुरित हो गया। कहीं फलियों में दाना दागी या सिकुड़ गया है। इससे फसल के अच्छे रेट भी नहीं मिलेंगे।
एसडीएम ऑफिस भी पहुंचे किसान
फसलों के सर्वे कराने जाने की मांग को लेकर गुरुवार को बैरसिया एसडीएम ऑफिस में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और उन्होंने सर्वे कराने की मांग की।
एमपी में भाव को लेकर भी किसान कर रहे आंदोलन
मप्र में सोयाबीन के दाम 6 हजार से 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल किए जाने को लेकर अलग-अलग किसान संगठन और राजनैतिक दल पिछले एक महीने से आंदोलित हैं। भारतीय किसान संघ समेत किसानों से जुड़े कई संगठन यह मांग उठा चुके हैं।



