पूर्व CM को राहत, दिग्गी राजा के खिलाफ मानहानि की याचिका खारिज: 2021 में संघ के कार्यकर्ता को कहा था चोर
भोपाल डेस्क :
एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह अक्सर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा दायर मानहानि के मामले में दिग्विजय सिंह पर आरोप तय हो गए हैं। इस मामले में अभी कोर्ट का फैसला आना बाकी है। इधर दिग्गी को मानहानि के एक दूसरे मामले में राहत मिली है।
ये है मामला
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 26 नवंबर 2021 को कांग्रेस पार्टी की जन जागरण अभियान के अंतर्गत राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील के ग्राम पिपलिया कला में जन समूह को संबोधित किया था। उसी दौरान सभा में मौजूद लोगों ने संघ से जुड़े हेमंत सेठिया की जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर शिकायत की थी।
सबसे पहले जानिए, दिग्गी राजा ने सभा में क्या कहा था
इस सभा में दिग्विजय सिंह ने जन समुदाय से कहा था कि “एक काम है, एक आपको सुझाव में दे रहा हूं कि जन जागरण अभियान चला हुआ है 1 दिन उसकी दुकान और घर के सामने सारे किसान इकट्ठे हो जाओ और इकट्ठे हो जाकर रामधुन गाओ, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम इसको सन्मति दे भगवान। इस कालाबाजारी करने वाले को, करने को तैयार हो, छापीहेड़ा के लोग करने तैयार हो, पूरे खिलचीपुर क्षेत्र के लोग करने तैयार हो, तो प्रियव्रत सिंह जी तारीख तय करेंगे और वहां 3 घंटे का रामधुन का कार्यक्रम होगा। हेमंत सेठिया के घर को घेरेंगे और घेर के उससे कहेंगे कि तू कालाबाजारी करना छोड़ और गरीबों के लिए तू जो करवा रहा है तेरी जमीन बचाने के लिए तो उसको खत्म कर नहीं तो हम तेरे को पूरे बाजार में खड़े होकर तेरे को दलाल कहेंगे, तेरे को ही बेईमान कहेंगे, तेरे को चोर कहेंगे, मंजूर है, डरोगे तो नहीं जो डर जाओगे तो मरोगे” इस पर संघ से जुड़े परिवादी हेमंत सेठिया ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर मानहानि का केस दर्ज कराया था।
कोर्ट ने केस किया खारिज
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के वकील और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय गुप्ता ने अपनी दलील प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिवादी के संबंध में उस सभा में उपस्थित व्यक्तियों द्वारा शिकायत करने पर दिग्विजय सिंह ने लोगों को इकट्ठे होकर रामधुन गाने के संबंध में सुझाव दिया है और आगे कार्यक्रम तय किया गया कि किसी भविष्य की नियत दिनांक को कार्यक्रम रखकर परिवादी से कालाबाजारी छोड़ने और अन्य कार्य बंद करने को कहा जाएगा और नहीं करने पर बेईमान और चोर कहा जाएगा, ऐसा भविष्य में कभी हुआ है ऐसा भी अभिलेख पर नहीं आया है। इसके परिवाद पत्र में उल्लेखित ट्रांसक्रिप्ट में दिग्विजय सिंह द्वारा पूछा गया कि हेमंत सेठिया कौन है? इससे स्पष्ट है कि दिग्विजय सिंह हेमंत सेठिया से पूर्व से परिचित नहीं है जो बातें कही गई वह उनके समक्ष शिकायत के रूप में प्रस्तुत की गई हैं और उनकी प्रतिक्रिया भविष्य में किए जाने वाले कार्य के संबंध में हैं जो एक प्रोत्साहन की श्रेणी में आता है। दिग्विजय सिंह के वकील ने कोर्ट में कहा कि परिवादी (हेमंत सेठ) की प्रतिष्ठा को नुकसान का उद्देश्य कुछ नहीं कहा था। जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं वे शब्द भारतीय दंड संहिता की धारा 499 की अपेक्षा को पूरा नहीं करते हैं।
एमपी-एमएलए कोर्ट ने की याचिका खारिज
एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश भोपाल द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि यह सही है की वाचन की स्वतंत्रता और सीमा तक न्याय संगत नहीं है कि वह दूसरे की प्रतिष्ठा को पूरी तरह भंग कर दें। प्रतिष्ठा का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार है लेकिन इस प्रकरण में जो बातें कही गई हैं उसे दिग्विजय सिंह का आशय या ज्ञान या विश्वास परिवादी की मानहानि करना नहीं कहा जा सकता है। इस प्रकार पूरे तथ्य और परिस्थितियों में विचारण न्यायालय द्वारा दिग्विजय सिंह के संबंध में पारित आदेश में हस्तक्षेप किए जाने की कोई आवश्यकता दर्शित नहीं होती है। पुनरीक्षणकर्ता की ओर से प्रस्तुत पुनरीक्षण याचिका सारहीन होने से निरस्त की जाती है।



