जयपुर

प्रदेश की पहली बंदे भारत ट्रेन शुरू होने से पहले विवाद: ट्रेन में स्टाफ की तैनाती पर रेलकर्मचारियों का जयपुर में प्रदर्शन, जयपुर डिविजन का स्टाफ लगाने की मांग

जयपुर डेस्क :

राजस्थान की पहली वंदे भारत ट्रेन का कॉमर्शियल रन अभी शुरू भी नहीं हुआ और उससे पहले ही विवाद शुरू हो गया। ट्रेन के संचालन में टिकट चैकिंग, लोको पायलट और गार्ड समेत अन्य स्टाफ जयपुर डिविजन से लगाने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर दिया। जयपुर मंडल मुख्यालय पर इसको लेकर कर्मचारी संगठन ने रैली भी निकाली और डीआरएम जयपुर को ज्ञापन सौंपा।

यूनियन के मंडल अध्यक्ष के.एस. अहलावत और मंडल मंत्री मुकेश चतुर्वेदी का तर्क है कि ट्रेन का कुल रन 443 किमी है। इसमें से 354 किमी मदार से रेवाड़ी जयपुर मंडल का है। बावजूद इसके ट्रेन में क्रू से लेकर टिकट चैकिंग का काम जयपुर को नहीं दिया जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल सीटीआई राम निवास चौधरी, संदीप जानू सहित 150 से अधिक टीटीई और रेल कर्मियों ने इसे लेकर डीआरएम ऑफिस का घेराव किया और डीआरएम को ज्ञापन देकर ट्रेन की वर्किंग जयपुर मंडल को दिलवाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वर्किंग जयपुर मंडल को नहीं मिली तो ट्रेन का संचालन नहीं करने दिया जाएगा।

जयपुर-असरवा ट्रेन को लेकर भी विरोध
यूपीआरएमएस के प्रवक्ता अनिल चौधरी और मंडल अध्यक्ष सौरभ दीक्षित ने बताया- जयपुर-असरवा ट्रेन में अभी तक भी टिकट चैकिंग का काम अहमदाबाद मंडल की ओर से ही किया जा रहा है। जबकि पिछले महीने प्रिंसिपल सीसीएम अर्चना श्रीवास्तव ने आश्वस्त किया था कि ट्रेन में टिकट चैकिंग स्टाफ जयपुर मंडल का ही चलेगा। लेकिन अभी तक भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में ये वादा खिलाफी है।

कर्मचारियों के साथ किए जा रहे इस दुर्व्यवहार का अंजाम प्रशासन को भुगतना होगा। उधर यूपीआरएमएस के प्रवक्ता अनिल चौधरी ने बताया- मंडल अध्यक्ष सौरभ दीक्षित ने डीआरएम नरेंद्र को पत्र लिखकर मांग की है कि जयपुर मंडल के कर्मचारियों के साथ किए जा रहे इस दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी रेलमंत्री के समक्ष वंदे भारत ट्रेन को अजमेर तक ले जाने का विरोध किया है।

राजधानी ट्रेन से बदला था नियम
यूनियन के जीएलओ अध्यक्ष सुभाष पारीक ने बताया- पहले देशभर में संचालित राजधानी एक्सप्रेस में टिकट चैकिंग स्टाफ दिल्ली मंडल का ही चलता था। इसके बाद जब एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा और सहायक महामंत्री मुकेश माथुर ने इसका विरोध किया तो रेलवे बोर्ड ने नियम बनाया कि जिस ट्रेन में प्राइमरी मेंटेनेंस जिस मंडल द्वारा किया जाएगा। उसमें टिकट चैकिंग स्टाफ भी उसी मंडल का होगा।

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