भोपाल

MP में BSP चलेगी बड़ा दांव, हर जिले में एक टिकट महिला को देगी बसपा: प्रदेश प्रभारी बोले- शिवराज की तरह पैसे नहीं, महिलाओं को सत्ता में भागीदार बनाएंगे

न्यूज़ डेस्क :

मध्यप्रदेश में चुनावी साल में महिलाओं को लेकर जमकर सियासत हो रही है। शिवराज सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए देने के लिए लाडली बहना योजना शुरू की है। तो कांग्रेस ने सरकार बनने पर 1500 रुपए महीना महिलाओं को देने का वचन दिया है। बीजेपी की योजना और कांग्रेस की घोषणा के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने भी बड़ा दांव खेलने की तैयारी शुरू की है।

बीएसपी के प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम ने मीडिया से चर्चा में कहा कि महिलाओं को लेकर बहुजन समाज पार्टी हमेशा आगे रही है। महिलाएं आगे बढ़ें इसलिए मायावती ने अपनी सरकार में महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की थीं। राजनीति में महिलाओं को आगे लाने का प्रयास किया। मप्र में हम लोग हर जिले में एक महिला को टिकट देंगे। इस पर विचार-मंथन चल रहा है।

सवाल- बसपा गठबंधन करेगी?
जवाब – अभी गठबंधन की कोई संभावना नहीं हैं, हालांकि ये हमारी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर निर्भर करता है। वो जैसा निर्णय लेंगी वैसा सबको अवगत कराया जाएगा।

सवाल- मप्र में आपने दौरा किया तो कैसा माहौल देखते हैं?

जवाब – अभी 11 अप्रैल को बीएसपी के तत्वावधान में सतना में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन हुआ था। इसमें बड़ी संख्या में पिछड़े वर्ग के लोग शामिल हुए। छतरपुर में बाबा साहब की जयंती मनाई गई। उसमें हजारों युवा व बुजुर्ग एकत्रित हुए। पूरे प्रदेश में इस बार बीएसपी के तत्वावधान में बाबा साहब की जयंती मनाई। आने वाले समय में BSP बड़ी ताकत बनकर उभरेगी।

सवाल- कुछ कथावाचक हिन्दू राष्ट्र की मांग कर रहे हैं, आप कैसे देखते हैं?
जवाब – इन लोगों के बारे में क्या कहूं। इन लोगों को संविधान पढ़ना चाहिए। संविधान में साफ-साफ लिखा है कि हम किसी जाति, धर्म, मजहब का माहौल नहीं बना सकते। इस देश में सबको अपने धर्म, मजहब को मानने, इष्ट देवता को पूजने का अधिकार है। इस तरह की बातें करना ठीक नहीं। ये देश डेमोक्रेटिक देश है। भारत एक विभिन्न प्रकार के फूलों का एक गुलदस्ता है। इस गुलदस्ते में तरह-तरह के फूल हैं। यदि गुलदस्ते में सिर्फ एक ही रंग के फूल होंगे तो वह गुलदस्ता सुन्दर नहीं होगा। आज भारत की मुख्यता विभिन्नता में एकता है, उसे बनाए रखना जरूरी है।

सवाल- हर बार चुनाव के बाद बसपा के विधायक पार्टी छोड़कर भाग जाते हैं, इससे निपटने क्या रणनीति होगी?
जवाब- इस बार रणनीति साफ है। पार्टी नेतृत्व ने इस पर काम शुरू किया है। इस बार बीएसपी एक-दो नहीं, दहाई क्रॉस कर सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करेगी। कोई विधायक भागने वाला नहीं हैं। हम अपने पार्टी के कैडर पर ज्यादा भरोसा करेंगे।

सवाल- टिकट वितरण कब से शुरू होगा?
जवाब- हम मई से अपने प्रत्याशियों को टिकट वितरण करना शुरू कर देंगे।

सवाल- चुनाव में टिकट वितरण को लेकर बसपा की क्या रणनीति होगी?
जवाब – बसपा ने पिछले कई चुनाव में एक भी क्रिमिनल को टिकट नहीं दिया। हम कभी भी किसी क्रिमिनल को राजनीति में आगे बढ़ने का मौका नहीं देना चाहते। मप्र में बहुजन समाज पार्टी एक भी क्रिमिनल को टिकट नहीं देगी। हम चाहते हैं, इस देश में स्वच्छ राजनीति हो। अच्छे पढ़े-लिखे लोग राजनीति में आगे बढ़ें। अच्छे लोग विधानसभा-संसद में पहुंचे जो इस देश की तरक्की में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। देश को सुपर पॉवर बनाकर रखें। क्रिमिनल लोग अगर राजनीति में जाएंगे तो देश को लूटने और नोंचने का काम करेंगे। हम किसी भी क्रिमिनल को मप्र में बर्दाश्त नहीं करेंगे। मप्र में किसी भी क्रिमिनल को टिकट नहीं देंगे।

सवाल- बहुजन समाज पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी?
जवाब – बीएसपी मप्र की सभी 230 सीटों पर पूरी दमखम से चुनाव लड़ेगी।

सवाल- आगे संगठन विस्तार और चुनाव को लेकर क्या रणनीति है?
जवाब – बीएसपी 22 अप्रैल से प्रदेशभर में बहुजन राज्य अधिकार यात्रा चलाएगी। सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक मुक्ति न्याय आंदोलन के तहत पूरे प्रदेश में यह यात्रा चलेगी। हमारी बूथ कमेटी, सेक्टर कमेटियों का गठन किया जा रहा है। आज प्रदेश में जनता बीएसपी को तीसरे विकल्प के रूप में देख रही है।

सवाल- चुनाव को लेकर बसपा के क्या मुद्दे रहेंगे?
जवाब – आज मप्र में हालात ऐसे हैं कि सरकारी योजनाएं लूटने के लिए बनाई जाती हैं। आयुष्मान योजना के कार्ड लेकर लोग भटक रहे हैं। इस योजना से गरीबों का इलाज नहीं हो रहा। बल्कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के अस्पतालों को फायदा हो रहा है।

सवाल- मप्र सरकार ने लाडली बहना योजना शुरू की है। इसे कैसे देखते हैं?
जवाब – मुख्यमंत्री जी ने लाडली योजना शुरू की है। इस योजना से वे क्या करना चाहते हैं। संविधान कहता है कि हर व्यक्ति अपने दम पर आत्मनिर्भर होकर खड़ा हो जाए। आज ये उन्हें डिपेंडेंट बनाना चाहिए। हम ये चाहते हैं कि महिलाएं, मेरी बहनें पढ़ें और वे डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनें। उनकी पढ़ाई के लिए अवसर पैदा करने चाहिए। उनका ड्रॉपआउट न हो इस पर कोई काम नहीं हो रहा। मप्र में 16 लाख बच्चों को कुपोषण हो चुका है। ये सरकार का लिखित जवाब है। इसमें सहरिया, गोंड आदिवासी, दलित, पिछड़ों के बच्चे हैं। मप्र में चारों तरफ करप्शन का माहौल है।

सवाल- सरकार एक लाख भर्तियों का दावा कर रही है, रोजगार को लेकर बसपा की क्या रणनीति है?

जवाब- अभी एक लेटर वायरल हुआ, जिसमें यह कहा गया कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियां आउटसोर्स से की जा रहीं हैं। संविधान की मूल भावना के विरूद्ध काम किया जा रहा है। संविधान में लिखा है एससी, एसटी, ओबीसी के बच्चों को सरकारी विभागों में आरक्षण के अनुसार भर्ती किया जाएगा। आज संविधान की मंशा के विरूद्ध काम हो रहा है। बीजेपी के लोगों की जो कंपनियां हैं, उन कंपनियों से लोगों ने भर्तियां करना शुरू कर दिया है। आज हर विभाग में आउटसोर्सिंग के जरिए इन्होंने अपने लोगों को भरना शुरू कर दिया।

सवाल-ग्वालियर में सरकार ने अंबेडकर महाकुंभ का आयोजन किया। क्या इससे दलित वोटों पर असर नहीं पड़ेगा?

जवाब – ग्वालियर में भाजपा के लोग महाकुंभ का आयोजन कर रहे हैं। ये सरकारी पैसे पर हो रहा है। उसको लेकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का एक लेटर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने सरकार से पैसे मांगे। जब वह सरकारी पैसे से हो रहा है तो सारे दलों के लोगों को आमंत्रित किया जाना चाहिए था। उस लेटर में ऐसा पता चला था कि पहले राज्यपाल जाने वाले थे, लेकिन अब मुख्यमंत्री उसके मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हो रहे हैं। जब यह आयोजन सरकारी पैसे से हो रहा है तो सबको बुलाया जाना चाहिए था। सरकारी पैसा पूरे देश का पैसा है। सरकारी पैसे से दलितों का वोट लेने के लिए उसे बीजेपी का लिमिटेड आयोजन बना दिया।

मप्र विधानसभा में महिलाओं की संख्या

2013 के विधानसभा में 30 महिलाएं विधायक चुनकर आईं थी। इनमें सबसे ज्यादा 16 महिलाएं सामान्य सीटों से चुनी गई थीं। वहीं 9 आदिवासी और 5 एससी वर्ग की महिलाएं विधायक बनी थीं। इनमें एससी और एसटी कैटेगरी की दो-दो महिलाएं कांग्रेस से विधायक बनी और भाजपा के टिकट पर आदिवासी वर्ग की 7 और अनुसूचित जाति वर्ग की एक महिला विधायक चुनी गई थी। वहीं बसपा से एससी वर्ग की दो महिलाएं विधायक बनी थीं।

2018 के चुनाव में मात्र 21 महिलाएं ही विधायक बन पाईं। 11 महिलाएं सामान्य कैटेगरी से चुनी गई। एसटी की 7 और एससी वर्ग से तीन महिलाएं विधायक बनकर विधानसभा में पहुंची। इनमें एसटी वर्ग की 4 और एससी की 3 महिलाएं विधायक बनीं। वहीं बीजेपी के टिकट पर एसटी वर्ग की 3 महिलाएं विधायक बनकर पहुंची हैं।

पार्टीमहिला विधायक(2013)महिला विधायक (2018)
कांग्रेस69
भाजपा2211
बसपा21

मप्र में SC के लिए रिजर्व हैं 35 सीटें..

मप्र में अनुसूचित जाति (SC) के लिए विधानसभा की 35 सीटें रिजर्व हैं। पिछले 2018 के चुनाव में बीजेपी को अनुसूचित जाति की 35 में से 18 सीटें मिली थीं, जबकि 15 सीटें कांग्रेस ने जीती थी। इससे पहले 2013 में बीजेपी को 35 में से 28 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 3 सीटें मिली थीं यानी बीजेपी को 10 सीटों का नुकसान हुआ था। इस तरह 2013 में अनुसूचित जनजाति (ST) की 47 सीटों में से बीजेपी ने 31 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं और एक निर्दलीय के खाते में गई थीं। भाजपा इस वोट बैंक को संभाल नहीं पाई और 2018 के चुनाव में बीजेपी 16 ही सीटें ही जीत पाईं, जबकि कांग्रेस की सीटें 15 से बढ़कर 30 हो गईं।

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