मध्यप्रदेश

पूर्व डिप्टी कलेक्टर का राजनीति में मोह भंग: नौकरी में वापस आना चाहती हैं निशा बांगरे

पूर्व डिप्टी कलेक्टर बोलीं- कांग्रेस ने कमिटमेंट किया, चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया

न्यूज़ डेस्क :

विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए डिप्टी कलेक्टर के पद से इस्तीफा देने वालीं अफसर निशा बांगरे का राजनीति से मोह भंग हो गया है। वे सरकारी नौकरी में वापस आना चाहती है। इसके लिए उन्होंने तीन महीने पहले मुख्य सचिव को आवेदन भेजा था। लेकिन अभी तक विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

इस बीच 27 मार्च को मध्यप्रदेश कांग्रेस ने उन्हें पार्टी का मुख्य प्रवक्ता बना दिया। इस नियुक्ति के बाद जब उन्हें डिबेट्स में शामिल होने के लिए कहा गया तो उन्होंने 3 महीने पहले भेजा गया आवेदन बुधवार को सार्वजनिक कर दिया।

निशा बांगरे छतरपुर जिले में बतौर डिप्टी कलेक्टर पोस्टेड थीं। छतरपुर जिले के लवकुश नगर में एसडीएम रहते उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। वे बैतूल जिले की आमला सीट से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहतीं थीं। इसी वजह से सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा शासन की ओर से जब स्वीकार किया गया तब तक कांग्रेस ने मनोज मालवे को उम्मीदवार घोषित कर दिया था। ऐसे में वे चुनाव नहीं लड़ पाईं थीं।

जानिए CS को लिखे आवेदन में निशा ने क्या लिखा…
1 अप्रैल 2018 से मैं मध्यप्रदेश शासन में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ थी। अपनी सेवा काल में त्यागपत्र देने से पूर्व शासन-प्रशासन द्वारा प्रदत्त सभी अधिकारों, कर्तव्यों और निर्देशों का पूर्ण निष्ठा और समर्पण से पालन किया। आम जन के अधिकारों एवं शासन की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का काम पूर्ण ईमानदारी के साथ किया है। मेरी सेवा अवधि में किसी प्रकार का कोई कारण बताओ नोटिस नहीं प्राप्त हुआ। न ही कोई विभागीय जांच हुई।

त्याग-पत्र देने के पश्चात् दुर्भावनापूर्ण कार्यवाहियां शुरू की गई। त्याग-पत्र भी परिस्थितिवश देना पड़ा, तब स्वयं के मकान के अंदर होने वाली पूजा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी।

त्याग-पत्र देने के बाद राष्ट्र एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए विधानसभा चुनाव 2023 में प्रत्याशी के रूप में भाग लेने के लिए दोबारा 12 सितंबर 23 को त्यागपत्र स्वीकार किए जाने के लिए आवेदन दिया। लेकिन, त्याग-पत्र 23 अक्टूबर 2023 को स्वीकार किया गया। मेरे वकील को आदेश 24 अक्टूबर 2023 को अवकाश के दिन बुलाकर दिया गया। 26 अक्टूबर 2023 को ईमेल के माध्यम से त्याग-पत्र स्वीकार होने का आदेश मुझे मिला।

जिस वजह से शासकीय अवकाश होने से मात्र 2 दिवस (27 अक्टूबर 23 और 30 अक्टूबर 23) मिले थे। जिसके कारण नामांकन पत्र के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज (अदेयता प्रमाण-पत्र इत्यादि) नहीं जुटा पाई, और नामांकन-पत्र नहीं भर पाई।

अतः जिस आधार पर त्याग-पत्र स्वीकार किया गया था, (विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने) वह परिस्थिति बन ही नहीं पाई। अत: आवेदिका पुनः डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवाएं देना चाहती हूं। 23 अक्टूबर 2023 को त्याग-पत्र स्वीकार होने के बाद से आज तक आवेदिका ने किसी भी निजी अथवा शासकीय संस्था में नियुक्ति नहीं प्राप्त की है। अतः आवेदिका का त्याग-पत्र वापस लेने का यह आवेदन सहानुभूतिपूर्वक स्वीकार किए जाने का अनुरोध है। मैं दिए गए दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण से करूंगी।

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