शिवराज बोले- और कुछ ना बांटो प्यार तो बांटते चलो: मोया कॉलेज में कहा मैं खडूस नेता नहीं हूं, जो कभी मुस्कराए ही ना

भोपाल डेस्क :
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान राजस्थान के अजमेर शहर के मेयो कॉलेज में आयोजित वर्ड काउंट-2024 कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा- मैं मप्र के बच्चों का मामा हूं। हम सब भारत मां के लाल भेदभाव का कहां सवाल। एक तो मामा उसको कहते हैं जो मां का भाई होता है। और दूसरा वो होता है जो बच्चों से मां जितना प्यार करता है मां-मां। मेरे बच्चों मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं आई लव यू।

मैं खडूस नेता नहीं
और कुछ ना बांटो प्यार तो बांटते चलो, मैं खडूस नेता नहीं हूं। जो कभी मुस्कराए ही ना। मैं मप्र में भी बच्चों के साथ मस्ती करता, मुस्कराता हूं। जहां भी जाता हूं। बच्चे गले से लिपट जाते हैं। मैं चीफ गेस्ट नहीं, अतिथि वो होता है जिसके आने की तिथि तय नहीं होती। मेरी तारीख तो इस कार्यक्रम की संचालक तय करवा कर आई थीं।
खुद को कमजोर समझोगे तो मुंह की मक्खी पड़ोसी को भगाने आना पडे़गा
मनुष्य जैसा सोचता है वैसा बन जाता है। अगर हम अपने आप को कमजोर समझेंगे तो हम कुछ नहीं कर सकते। अपने मुंह की मक्खी भगाने पड़ोसी को आना पडे़गा। हमारा मन कई बार निगेटिव तो कई बार पॉजिटिव सोचता है। एक आपका अवचेतन मन होता है। आप जैसा सोचते हैं अवचेतन मन वैसा करना शुरू कर देता है।
आपने सोचा कि मैं ये नहीं कर सकता तो अवचेतन मन तुरंत प्रतिक्रिया करता है और हम वैसे ही हो जाते हैं डरे, सहमे। एक छोटा सा उदाहरण है अगर वैष्णो देवी जाना हो दर्शन करने, कोई कहे कि 14 किमी पहाड़ चढ़ जाओ तो हम कहेंगे कि पागल है क्या 14 किमी क्यों चढ़ें। लेकिन अगर वैष्णों देवी के दर्शन करने का तय कर लो कि जाना है तो बच्चे भी चढ़ जाते हैं। इसलिए बड़ा करने का सोचो। जितने भी बडे़ लोग बने, वो सब हमारे जैसे हाड़ मांस के पुतले थे।



