इंदौर

एक्सीडेंट में कटकर अलग हुए हाथ को इंदौर में जोड़ा: चार घंटे में बर्फ की थैली में हाथ रखकर अस्पताल पहुंचे, 9 घंटे चली सर्जरी, अब करने लगा मबमेंट

इंदौर डेस्क :

इंदौर में डॉक्टरों ने महिला के शरीर से अलग हो चुके बाएं हाथ को पूरी तरह से जोड़ दिया है। 165 किमी दूर हुए इस हादसे के बाद महिला का चार घंटे में इंदौर तक आना सबसे दर्दनाक रहा। महिला की सर्जरी 9 घंटे चली। अब महिला के हाथ की तीन उंगलियों में मूवमेंट शुरू हो गया है। जल्द ही पूरा हाथ काम करने लगेगा।

हादसा नलखेड़ा से इंदौर लौटते समय हुआ। बुजुर्ग महिला अपने पोते के साथ जीप की विंडो सीट पर बैठी थी। महिला का हाथ आधा बाहर निकला हुआ था। इसी दौरान एक ट्रक इतनी नजदीक से गुजरा कि महिला के हाथ को शरीर से अलग करते हुए निकल गया। महिला की चीख सुनकर ड्राइवर ने तत्काल गाड़ी रोकी। कार में बैठे बेटे ने महिला का हाथ ढूंढा। और इंदौर के एक अस्पताल में फोन लगाकर डॉक्टरों से बात की। डॉक्टरों ने कहा कि महिला के कटे हाथ को आइस बॉक्स में रख कर इंदौर ले आएं।

डॉक्टरों ने सर्जरी कैसे ये बताएंगे लेकिन पहले हादसा कैसे हुआ ये जान लीजिए…

हादसा 4 जून की रात नलखेड़ा से इंदौर लौटते समय आगर रोड पर हुआ। महिला परिवार के साथ रात 9.30 बजे कार से घर लौट रही थी। तभी सारंगपुर से 15 किमी दूर सामने से तेज रफ्तार से आ रहा ट्राला रांग साइड से आया और जीप से सटकर निकला। इस दौरान जीप एक ओर से पूरी तरह पिचक गई। पीछे की सीट पर 55 वर्षीय महिला दो साल के पोते को गोद में लेकर बैठी थी। महिला का एक हाथ विंडो से बाहर निकला था। हादसे में उसका बायां हाथ तेजी से खिंचाया और कोहनी के नीचे से कटकर सड़क पर दूर जा गिरा।

बेटे ने तत्काल कटा हाथ उठाया और डॉक्टरों को फोन किया

घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि महिला को कुछ पता ही नहीं चला। हाथ कटते ही महिला जोर से चिल्लाई। ड्राइवर ने तत्काल गाड़ी रोकी। बेटे ने मां का कटा हाथ देखा और उन्हें संभालने लगा। तभी उसने इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में डॉक्टरों को फोन लगाया। डॉक्टरों ने कहा कि कटा हाथ ढूंढो और उसे आइस बॉक्स में रखकर जितनी जल्दी हो इंदौर पहुंचो। उतरा और तेज दौड़ते हुए अंधेरे में कटा हाथ ढूंढ़ा और अपने पास रखा। परिजनों ने बदहवास हो चुकी महिला को संभाला। बेटे ने प्लास्टिक की थैली में मां का कटा हाथ रखा और नजदीक की होटल व ढाबों से बर्फ लेकर थैली में डाला। इंदौर आते-आते उन्हें दो-तीन बार ऐसा करना पड़ा।

ब्लीडिंग रोकने के लिए रास्ते में कराना पड़ी ड्रेसिंग

हाथ कट जाने से लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। परिजनों ने उसे बांधा और रास्ते में शाजापुर के एक अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने स्टीचिंग की और पेन किलर इंजेक्शन दिया। रात करीब डेढ़ बजे परिजन महिला व कटे हाथ को लेकर हॉस्पिटल पहुंचे। तब तक अस्पताल में सर्जरी की तैयारी हो चुकी थी।

ऐसे की सर्जरी

डॉक्टरों ने सबसे पहले कटे हाथ को साफ किया। इसके साथ ही उसकी हडिडयां, वेन, मांसपेशियां व्यवस्थित की। फिर महिला को ऑपरेशन थिएटर में लिया। यहां डॉक्टरों ने सबसे पहले अलग हो चुकी हाथों की दो हडिड्‌यों को जोड़ा। फिर हाथ की दो आर्टरीज को जोड़ा। इसके बाद वेन्स और नर्व को जोड़ा। फिर ऊपर से स्टिच किया। इस दौरान महिला को छह यूनिट ब्लड चढ़ाना पड़ा। यह सर्जरी नौ घंटे तक चली। यह सर्जरी प्लास्टिक सर्जन डॉ. योगेश टटवाडे के नेतृत्व में की गई। इसमें अर्थोपैडिक एक्सपर्ट डॉ. आनंद गुप्ता और एनेस्थेटिस्ट डॉ. चारू नीमा की टीम की विशेष भूमिका रही। खास बात यह कि तीसरे दिन दिन से ही महिला की हाथ की उंगलियों में सेंसेशन आ गया और हिलाने लगी।

जटिल सर्जरी के ये रहे खास मायने

– डॉ. योगेश टटवाडे के मुताबिक इस जटिल सर्जरी में शुरुआत से लेकर आखिरी तक बारीकी से ध्यान रखा गया। दरअसल ऐसे मामलों में सबसे पहले टूटी हडिड्यों को जोड़ा जाता है ताकि मुख्य आधार बने। फिर हाथ की दो आर्टरीज को जोड़ा। आर्टरीज से हाथ में खून का संचार होता है। ऐसे ही फिर चार वेन्स को जोड़ा क्योंकि आर्टरीज से जो खून का संचार होता है वह वेन्स के जरिए वापस लौटता है।

अगर आर्टरीज से संचारित खून वेन्स के जरिए वापस नहीं लौटे तो हाथ ही खराब हो जाता है। इसके बाद नर्व व मांसपेशियों को व्यवस्थित करने के लिए क्लेम्स लगाए गए जो बाद में निकाल लिए और आखिरी में स्टिच किए गए। इस तरह महिला के हाथ में खून का संचार होने के साथ वह वेन्स के जरिए वापस संचारित भी हो रहा है।

– महिला का पंजे के पास एक और फ्रेक्चर है लेकिन कटे हाथ को जोड़ना प्राथमिकता थी। अभी की हालत में उक्त फ्रैक्चर को लेकर कुछ उपचार किया तो इस बड़ी सर्जरी को नुकसान हो सकता है। उसे बाद में किया जाएगा।

– डॉक्टरों के मुताबिक शरीर से अलग हो चुके हाथ, पैर, उंगुलियों को छह घंटे में आइस बॉक्स में अगर सुरक्षित लाया जाए तो उसे फिर से जोड़ा जा सकता है।

– इस मामले में जैसे ही महिला का हाथ कटकर दूर जा गिरा तो परिवार ने तत्काल उसे सुरक्षित उठा लिया। अगर उस पर कोई वाहन निकल जाता तो वह सर्जरी कर जोड़ने लायक स्थिति में नहीं रहता।

– परिजन ने समय की नजाकत को समझा और डॉक्टरों से राय लेकर कटे हाथ को समय से पहले ले आए।

– परिजन द्वारा रास्ते में शाजापुर में महिला का ड्रेसिंग कराना भी सार्थक रहा जिससे ब्लीडिंग थम गई।

– इस तरह के केसेस में अगर हाथ कटकर अलग होता है और अगर हडिडयां, आर्टरीज, वेन्स पूरी तरह से क्षत-विक्षत होती तो फिर सर्जरी की राह और कठिन होती।

– महिला का धैर्य खास तौर पर अहम रहा। उसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज आदि नहीं था जिसके चलते सर्जरी समय पर प्लान हुई।

हाथ जुड़ जाने से बढ़ा मरीज का आत्मविश्वास

डॉक्टरों के मुताबिक अभी अंदरुनी घाव भरने में समय लगेगा तथा उंगलियां अच्छा रिस्पांड कर रही हैं। उसे करीब एक हफ्ते बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। कुछ समय बाद फिजियोथैरपी होगी। फिर वह धीरे-धीरे वह हाथ भी उठाने लगेगी। बकौल डॉ. टटवाडे शरीर से अलग हो चुका हाथ और फिर से उसे जोड़ने को लेकर मरीज की मानसिकता अलग-अलग होती है। कटे हाथ को फिर से जोड़ने के कुछ समय बाद भले ही वह पहले की तरह भारी भरकम वजन न उठा पाए या पहले जैसी गतिविधि न करें लेकिन उसका जुड़ना, सामान्य मूव करना ही मरीज को काफी आत्मविश्वास बढ़ा देता है। उसे फिर अपंगता का बोध नहीं होता। वह अपने सामान्य कामकाज धीरे-धीरे कर सकती है।

(परिजनों के आग्रह पर महिला की पहचान को गोपनीय रखा गया है।)

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