स्टेट्स टाइगर रिपोर्ट 2022 में खुशखबरी-: 185 बाघों की संख्या में इजाफा, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को मिला देश में दूसरा पायदान, कान्हा को 5वां
भोपाल डेस्क :
मध्यप्रदेश में साल 2018 से लेकर अब तक कुल 185 बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसका खुलासा भी स्टेट्स टाइगर रिपोर्ट 2022 के लिए एमपी से भेजे गए आंकड़ों में हुआ है। इतना ही नहीं बल्कि एमपी के टाइगर रिजर्व की स्थिति भी अन्य प्रदेशों से बेतहर बताई गई है। मैनेजमेंट इफेक्टिवनेश इवेल्युवेशन में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को दूसरा स्थान मिला है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने भी मध्यप्रदेश के बाघों के संरक्षण की सराहना की है।
रविवार को पीएम मोदी ने कर्नाटक में टाइगर रिपोर्ट को जारी किया था। हालांकि रिपोर्ट में टाइगर स्टेट लेकर खुलासा नहीं किया गया है। साल 2018 के मुताबिक यह खिताब मध्यप्रदेश के पास है। देश में किस प्रदेश में कितने बाघ हैं इसका खुलासा 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के दिन होगा। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल 711 बाघों की जानकारी की प्रारंभिक जानकारी केंद्र को भेजी गई है। साइंटिफिक रिपोर्ट के बाद बाघों की स्थिति साफ होगी। रिपोर्ट में कान्हा टाइगर रिजर्व को देश में 5वां स्थान तो पन्ना टाइगर रिपोर्ट को 22 वां स्थान मिला है।
देश में एमपी के टाइगर रिजर्व की स्थिति
– सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को दूसरा स्थान मिला, अंक- 93.18
– कान्हा टाइगर रिजर्व को पांचवा स्थान, अंक- 91.67
– पेंच टाइगर रिजर्व को मिला 13 वां स्थान, अंक- 88.09
– बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को मिला 21 वां स्थान, अंक- 83.33
– पन्ना टाइगर रिजर्व को मिला 22 वां स्थान- अंक- 83.33
– संजय दुबरी टाइगर रिजर्व को मिला 36 वां स्थान- अंक- 72.33
(नोट- रिपोर्ट में किसी भी टाइगर रिजर्व को 94.38 से अधिक अंक नहीं मिले हैं।)
सात सालों में 189 बाघों ने तोड़ा दम
टाइगर स्टटे मध्यप्रदेश में बाघों के मौत के आंकड़े भी कम नहीं है। वन विभाग के मुताबिक बीते सात सालों में प्रदेश में अलग-अलग कारणों से 189 बाघों ने दम तोड़ा। सौ से अधिक बाघ तो बाघों वर्चस्व की लड़ाई में दम तोड़ा। वाइड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने बताया कि वन विभाग बाघों की सामान्य और वर्चस्व की लड़ाई में हुई मौत को एक मानता है। लेकिन, बाघों के आपसी संघर्ष को रोका जा सकता है। यदि विभाग बाघों की बढ़ती संख्या के हिसाब से क्षेत्र विस्तार के लिए तमाम पहल करता तो एमपी में बाघों की संख्या भी देश में सर्वाधिक होती। बाघों के शिकार के मामलों में भी मध्यप्रदेश बता दें कि बाघ की औसत आयु भी 12 से 14 साल की होती है।
मध्यप्रदेश में क्षमता से ज्यादा बाघ
यह बात भी चौकाने वाली है कि मध्यप्रदेश में क्षमता के अधिक बाघ हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 124 बाघ मौजूद हैं। क्षमता 75 बाघों की हैं। इसी प्रकार पेंच टाइगर रिजर्व में 50 बाघों की क्षमता के विपरीत 82 बाघ हैं। प्रदेश में ऐसे ही हालात अन्य टाइगर रिजर्व के हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार चार नए अभयारण्य को बनाने की तैयारी भी कर रही है।



