MP अजब है गजब हैं, ग्वालियर में हुआ अनोखा समझौता: पत्नियों ने सप्ताह में तीन-तीन दिन पति के साथ रहने बांटे, रविवार को अपनी मर्जी से रहेगा
न्यूज़ डेस्क :
ग्वालियर के फैमिली कोर्ट में फैसले से पहले काउंसलिंग में एक अनोखा समझौता हुआ है। इस तरह का समझौता पहले कभी नहीं हुआ है। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दो पत्नी थी। समझौता हुआ है कि पत्नियां तीन-तीन दिन पति के साथ रह सकेंगी। रविवार छुट्टी का दिन होता है, ऐसे में पति को स्वतंत्रता होगी और वह अपनी मर्जी से जिसके साथ रहना चाहेगा वहां जा सकेगा। इस पर कोई आपत्ति नहीं उठाएगा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने गुरुग्राम (गुड़गांव) में अपने दो फ्लैट में से एक-एक दोनों पत्नियों को दे दिए हैं। इस अनोखे समझौते की चर्चा पूरे शहर में हैं।
छह महीने में पांच बार काउंसलिंग
शहर के फैमिली कोर्ट में कुछ समय पहले 28 वर्षीय कविता (बदला हुआ नाम) पति से भरण पोषण के लिए आवेदन करने पहुंची थी। उस समय फैमिली कोर्ट के काउंसलर एडवोकेट हरीश दीवान से महिला की मुलाकात हुई। इस पर काउंसलर ने महिला को समझाया कि महिला और उसके बेटे के भरण पोषण के लिए कोर्ट 7 से 8 हजार रुपए तक ही दिलाएगा, इससे उसका क्या फायदा होगा। इसके बाद काउंसलर हरीश दीवान ने उससे पूरा मामला समझा और उसका पति अमर (परिवर्तित नाम) जो गुरुग्राम हरियाणा की एक मल्टी नेशनल कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर पदस्थ है से फोन पर बात की। उसे भी समझाया गया। यहां काउंसलर ने पति-पत्नी से बात की और एक अनोखा समझौता करा दिया। न्यायालय में केस पहुंचने से पहले ही काउंसलर ने दोनों के बीच सुलह करा दी। दोनों पत्नियों ने हफ्ते के तीन-तीन दिन आपस में बांट लिए। पति तीन-तीन दिन उनके साथ रहेगा। रविवार को पति की छुट्टी रहेगी। वह अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रुक सकता है। अवकाश के दिन पत्नियों का प्रतिबंध उस पर नहीं रहेगा। दोनों पत्नियों के साथ रह सके उसके लिए दोनों को गुरुग्राम में एक-एक फ्लैट दे दिया है। पति-पत्नी के बीच सुलह कराने के लिए कुटुंब न्यायालय के काउंसलर हरीश दीवान व उनकी पत्नी बबीता दीवान ने पांच बार काउंसलिंग की।
यह है पूरा मामला
ग्वालियर निवासी कविता (परिवर्तित नाम) का विवाह 2018 में हुआ था। पति हरियाणा के गुरुग्राम में मल्टी नेशनल कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर है। वेतन के रूप में उसे मोटी सैलरी मिलती है। दो साल तक पति-पत्नी साथ रहे। उनका एक बच्चा भी है। बच्चा होने और लॉकडाउन लगने के बाद 2020 में पत्नी को उसका पति ग्वालियर मायके में छोड़ गया, फिर उसे लेने नहीं आया। इसी बीच इंजीनियर का कंपनी में साथ काम करने वाली महिला कर्मचारी के साथ संबंध बन गए। वह उसके साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगा और विवाह कर लिया। दूसरी पत्नी से भी एक लड़की का जन्म हुआ है। जब पति साथ लेकर नहीं जा रहा था तब महिला ने पूरी हकीकत गुरुग्राम पहुंचकर पता की। पति की दूसरी पत्नी का खुलासा हुआ। महिला का पति के साथ विवाद होने लगा। कुटुंब न्यायालय में वह अपने व लड़के के लिए भरण पोषण लेने के लिए केस दायर करने आई थी। कुटुंब न्यायालय में काउंसलर हरीश दीवान से मुलाकात हुई और उन्होंने इस केस की काउंसलिंग की और अनोखा समझौता कराया।
काउंसलर ने इंजीनियर को बताए नतीजे
काउंसलर हरीश दीवान ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर को समझाया कि इस मामले में कोर्ट में मामला जाने से उसे बहुत सारे नुकसान हो सकते हैं। इसलिए वह आउट ऑफ कोर्ट बातचीत कर समझौता कर ले। इससे वह भी खुश रहेगा और उसकी पत्नियां भी खुश रहेंगी। कुछ इस तरह काउंसलर ने इस केस की बारिकियां दूसरे पक्ष को समझाई हैं। जो इस प्रकार हैं-
- पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी पत्नी को कानूनी दर्जा नहीं मिल सकता है।
- ऐसी स्थिति में पहली पत्नी दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज करा सकती है।
- पहली पत्नी कुटुंब न्यायालय में भी केस दायर कर सकती है। पुलिस व न्यायालय में लगातार चक्कर काटने पड़ेंगे।
- FIR दर्ज होने के बाद नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।
- न्यायालयीन प्रक्रिया का लंबे समय तक सामना करने से परेशान हो जाओगे।
काउंसलर बोला- समझौता कराया
फैमिली कोर्ट के काउंसलर हरीश दीवान का कहना है कि मैंने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर समझौता कराया है। दोनों पत्नियां उसके साथ तीन-तीन दिन रहने को तैयार थीं। वह भी दोनों की जिम्मेदारी निभाने का वादा कर रहा है। ऐसे में न्यायालय से पहले ही केस में समझौता हो गया है।



