
विदिशा डेस्क :
मृत्यु होने के बाद मृत शरीर से बहुत लोगों को जीवनदान मिल सकता है, पर बहुत कम लोग देहदान करते है। आज भी कुछ ऐसे लोग हैं जो मृत्यु के बाद अपने शरीर के अंगों को दानकर दूसरों को नया जीवन देने का जज्बा रखते हैं। जिन्होंने जीते जी अपनी मौत के बाद अपने शरीर की वसीयत लिख दी , जिससे ना केवल जरूरतमंदों को उनके अंग लगाए जा सकें, बल्कि यह मेडिकल रिसर्च में भी काम आ सकेगा ।
विदिशा में समाजसेवी विकास पचौरी ने देह दान नेत्रदान व रक्तदान के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिससे लोग मृत्यु के बाद अपने मृत शरीर का देहदान और नेत्रदान कर सके। विकास के ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के सार्थक परिणाम सामने आने लगे है। मार्च महीने में 12 लोगो ने मृत्यु के बाद अपने मृत शरीर का देहदान और नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भरे हैं।

समाजसेवी विकास पचौरी ने बताया कि बीते वर्षों में अभी तक 524 व्यक्तियों द्वारा यह संकल्प पत्र भरे गए हैं। उन्हीं में से 18 लोगों की मृत्यु होने के बाद उनके मृत शरीर का दान अलग-अलग मेडिकल कॉलेज में कराया गया। वही 261 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा है। उनकी मृत्यु होने के बाद 8 व्यक्तियों का नेत्रदान हो चुका हैं।
विकास पचौरी ने अपील की है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए एवं पीड़ित मानवता की सेवा के लिए सभी लोग इस बारे में विचार करें कि मरने के बाद राख होने से अच्छा है देहदान एवं नेत्रदान का संकल्प लेकर पीड़ित मानवता के काम आए।

मार्च महीने में देह दान करने वाले लोग
मंडी बामोरा के मनोज कुमार चौरसिया एवं उनकी धर्मपत्नी पुष्पांजलि चौरसिया, विदिशा के दिनेश नहारिया एवं उनकी धर्मपत्नी ज्योति नहारिया के अलावा संतोष नामदेव, किशोर सिंह पवार, दीपक शर्मा, महेंद्र सिंह दांगी, देवी सिंह रघुवंशी, तारा देवी बंजारे, नरेंद्र कुमार अहिरवार, निर्मल कुमार ने देह दान का संकल्प पत्र भरा है।



