विदिशा

रिटायर्ड शिक्षक ने कराया गौशाला का निर्माण: ताकि कड़ाके की ठंड और बारिश में मवेशियों को मिल सके आसरा

आनंदपुर डेस्क :

लटेरी तहसील के ग्राम जावती में एक रिटायर्ड शिक्षक अपने खुद के खर्चे से स्थाई गौशाला का निर्माण कर रहे हैं जिससे कि ऐसी भीषण कड़ाके की ठंड में बेसहारा मवेशियों को एक स्थाई आसरा मिल सके और यह गौशाला भी कोई छोटी-मोटी नहीं है बल्कि 80 फीट लंबी और 40 फीट चौड़ी गौशाला का निर्माण तीन सेट का निर्माण कर रहे हैं।
जिसमें अंदर तीन होदिया भी बनाई गई है जिससे की रात के समय यह मवेशियों इन होदिया में से घास भूसा आदि सुकून से खा सके।

पत्नी की मृत्यु के उपरांत किया था मृत्यु भोज का परित्याग

गौशाला निर्माण करा रहे रिटायर्ड शिक्षक लक्ष्मण सिंह मीना से हमने जब इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया की ऐसी कड़ाके की सर्दी में यह बेसहारा मवेशियों दर-दर भटकती रहती है सर्दी के चलते कई मवेशियों की तो सड़कों पर मौत भी हो जाती है ऐसे हालातो को देखकर ही मैंने गौशाला बनवाने का निश्चय किया है साथ ही उन्होंने बताया कि लगभग तीन साल पहले मेरी धर्मपत्नी की असमय मृत्यु हो गई थी तब मैंने मृत्यु भोज का पूरी तरह से परित्याग कर उनकी पुण्य स्मृति में मीना समाज के मंदिर में एक धर्मशाला बनाने का निश्चय किया था।

लेकिन फिर मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना इसी पैसे से धर्मशाला ना बनाकर एक स्थाई गौशाला का निर्माण कराया जाए। जिससे इन बेसहारा मवेशियों को स्थाई घर तो मिलेगा ही साथ ही जावती के किसान भी सुकून से घरों में सो सकेंगे क्योंकि मवेशियों जब गौशाला में स्थाई रूप से रहेंगी तो उनकी फसलों को कोई नुकसान नहीं होगा। गौशाला में अभी ऊपर टीम सेट करना बाकी है। लोहे के एंगल लगवा कर चारों और मैटी बांध दी गई है बस थोड़ा पैसा और आ जाए तो इसमें ऊपर तीन सेट और करवा दिया जाएगा फिलहाल तो अभी 50-60 हजार रुपए ही खर्च हुए हैं लगभग ₹100000 का काम और शेष है उसे भी पूरा करना है।

बारी-बारी से डालते हैं भूसा

साथ ही ग्राम जावती निवासी लक्ष्मण सिंह मीणा ने बताया कि ग्राम के लगभग 27- 28 व्यक्तियों की एक टीम बना ली गई है उनकी प्रतिदिन ड्यूटी लगाई जाती है कि शाम को इन गायों के लिए भूसा रखने का कार्य करेंगे इस तरह से एक महीने में एक व्यक्ति का नंबर आता है। दिन के समय इन मवेशियों को गौशाला से भर एक जगह छोड़ देते हैं दिन में इन्हें वहां पर चार/भूसा डाल देते हैं तो दिनभर यह भर भूसा खाती रहती हैं और शाम होते ही यह मवेशियों बगैर किसी के गौशाला में अपने आप चली आती है।

 

Related Articles

error: Content is protected !!