विदिशा

रामलीला: लक्ष्मण ने रावण से सीखी राजनीति, भगवान राम का राज्याभिषेक होते ही गूंजे जय श्री राम के जयकारे

आनंदपुर डेस्क :

आदर्श रामलीला मंडल के द्वारा की जा रही 11 दिवसीय रामलीला का राम राज्याभिषेक के साथ ही समापन हो गया।
उल्लेखनीय की यह रामलीला 20 मई से शुरू हुई थी और अंतिम दिवस राम लक्ष्मण और मेघनाथ में भीषण संग्राम हुआ जहां पर लक्ष्मण जी ने मेघनाथ जो की इंद्रजीत भी कहलाता था, का वध कर विजय श्री को अर्जित किया।
जैसे ही लंकापति रावण को अपने पुत्र मेघनाथ की मृत्यु का समाचार मिलता है तो वह और अधिक क्रोधित हो जाता है तब अपने छोटे भाई कुंभकरण को युद्ध के लिए रणभूमि में भेजता है कुंभकरण कहते हैं कि हे भ्राता राम स्वयं विष्णु का अवतार है आप माता सीता को उन्हें ऐसा सम्मान वापस लौटा दें लेकिन रावण एक नहीं मानता कुंभकरण भी अपने भाई की बात को ना काटते हुए रणभूमि में भगवान राम से युद्ध के लिए पहुंच जाता है जहां भगवान राम के हाथों उसका वध हो जाता है।


अब एक मात्र रावण ही लंका में शेष बचा हुआ था रावण ने अपनी पूरी शक्तियां एकत्रित कर सुसज्जित रथ पर सवार होकर भगवान राम से युद्ध करने पहुंचा मायावी राक्षस ने भगवान राम को कई बार छकाया भगवान राम भी दशानन रावण के बार-बार शीश और भुजाएं काट-काट कर परेशान होने लगे तभी विभीषण ने आकर बताया कि हे प्रभु रावण की नाभि में अमृत कुंड है जब तक अग्निबाण से उसे नहीं सुखाया जाता तब तक रावण का वध करना संभव नहीं है तब भगवान राम ने एक ही अग्निबाण में रावण की नाभि में छुपे अमृत कुंड को स्वाहा कर रावण का नरसंहार कर दिया।


रावण वध के बाद भगवान राम ने अपने छोटे अनुज लक्ष्मण से कहा की हे भाई लक्ष्मण रावण महा ज्ञानी पंडित है और आप उनसे राजनीति सीख कर आओ तब लक्ष्मण जी जाते हैं और लंका पति रावण के सिर के पास खड़े होकर प्रणाम करते हैं तो रावण कोई उत्तर नहीं देते जैसे ही लक्ष्मण पैरों की और आकर रावण को अभिवादन करते हैं तो रावण लक्ष्मण जी को राजनीति सीखते हैं और कहते हैं कि है लक्ष्मण अपना धनुष बाण मुझे दीजिए तो लक्ष्मण बिना किसी देरी के अपना धनुष बाण रावण को थमा देते हैं तब रावण कहता है की राजनीति का पहला गुण यही है कि कभी भी अपने हाथ का हथियार शत्रु को नहीं देना चाहिए मैं चाहूं तो अभी एक ही बाण से तुम्हें मार सकता हूं साथ ही बताया कि मेरा कुल तुम्हारे से बड़ा है और ज्ञान में भी अधिक ज्ञानवान लेकिन फिर भी मैं हार गया क्यों, क्योंकि राम के साथ तुम थे और मेरे साथ मेरा भाई नहीं था।


कभी भी जो सोच लिया उस कार्य को पूरा करने के लिए कल पर नहीं छोड़ना चाहिए मैंने सोचा था कि स्वर्ग में सीढ़ियां लगवाऊंगा समुद्र के पानी को मीठा बनाऊंगा लेकिन मैंने यह कल पर छोड़ दिया इसलिए आज तक भी पूरा नहीं कर पाया।

रावण वध के साथ ही भगवान राम अपने सभी मित्र और साथियों के साथ अयोध्या पहुंचे जहां भगवान राम का राज्याभिषेक पूर्ण विधि विधान से किया गया जेसे ही भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ चारों जय श्री राम जय जय श्री राम के नारे गूंज उठे।

उमड़ा जन सैलाब

रामलीला के अंतिम दिवस रामलीला देखने के लिए आनंदपुर सहित आसपास के श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमर पाड़ा इस दौरान माता बहने सबसे अधिक उपस्थिति रही। इस अवसर पर लगभग 4000 से अधिक श्रद्धालुओं ने रामलीला के 11 दिन रामलीला का मंचन देखा।
इस अवसर पर रामलीला मंडल के वरिष्ठ कार्यकर्ता नीरज श्रीवास्तव, संजय चौरसिया ने आदर्श रामलीला मंडल की ओर से सभी श्रोताओं, पत्रकारों, पुलिस बल, सहयोगियों सभी का दिल से आभार व्यक्त किया।

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