मध्यप्रदेश के सरकारी डॉक्टर्स हड़ताल पर: भोपाल के हमीदिया में 32 ऑपरेशन टाले; मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया
भोपाल डेस्क :
मध्यप्रदेश के 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर बुधवार से हड़ताल पर चले गए। हड़ताल का असर भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दिखाई दे रहा है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज ज्यादा परेशान हैं। प्रदेश के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भर्ती 228 मरीजों के ऑपरेशन बुधवार को टाल दिए गए हैं।
बता दें, मंगलवार को हड़ताल खत्म करने के लिए रात करीब 8 बजे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के आवास पर बैठक हुई। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, चिकित्सक संगठन के पदाधिकारी और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा मौजूद रहे। करीब एक घंटे चली बैठक में भी कोई सहमति नहीं बन पाई। डॉक्टरों ने केंद्र सरकार के समान डीएसीपी लागू कराने की मांग की। मंत्री ने कहा कि कमेटी से एक-दो मीटिंग और कर लेते हैं, इसके बाद फैसला लेंगे। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि बैठक करते-करते तो चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी। यह कहकर डॉक्टर बाहर निकल आए।
संभागायुक्त ने हड़ताल कर रहे डॉक्टर को हॉस्पिटल बिल्डिंग से बाहर किया
मप्र शासकीय स्वशासी संघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय को संभागायुक्त माल सिंह ने हमीदिया अस्पताल की बिल्डिंग से बाहर कर दिया। डॉ. मालवीय, हॉस्पिटल बिल्डिंग में बने वार्ड में ड्यूटी कर रहे साथी डॉक्टर्स से चर्चा करने पहुंचे थे। तभी संभागायुक्त माल सिंह, कलेक्टर आशीष सिंह और जीएमसी डीन डॉ. अरविंद राय, हॉस्पिटल का राउंड लेने वार्ड में पहुंच गए। जहां डॉक्टर्स की हड़ताल की अगुवाई कर रहे डॉ. राकेश मालवीय को वार्ड में देख वह नाराज हो गए।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- डॉक्टर भगवान का रूप, स्ट्राइक कॉल ऑफ करें
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा, सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डाक्टरों से बातचीत चल रही है। कई मुद्दे थे उन सब पर सहमति भी बनी है। एक-दो मुद्दे थे, जिस पर सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन फिर भी हम लोगों ने बातचीत की है। डॉक्टरों से अनुरोध किया है कि स्ट्राइक कॉल ऑफ करें। वैसे भी ये मानवता से जुड़ा हुआ है। समाज में भी डॉक्टरों की हमेशा इज्जत रही है। उनको भगवान के रूप में मानते हैं। इसलिए उनको स्ट्राइक वापस लेना चाहिए।

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन भी हड़ताल पर
मध्यप्रदेश मेडिकल टीचर एसोसिएशन, चिकित्सक संघ के आह्वान पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन भी हड़ताल पर है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि पुरानी मांग थी, उसको लेकर हड़ताल जनवरी-फरवरी में की थी। सरकार ने कमेटी बनाई थी, लेकिन मसौदे को आगे नहीं बढ़ाया। ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मांग भी पेंडिंग है। जेडीए की मांग स्टाइपेंड को बढ़ाने की है। प्रदेश के जिला अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर जो गए हैं, उनके रहने की व्यवस्था नहीं की गई है। प्रमोशन टाइम पर मिलना चाहिए आदि प्रमुख मांग शामिल है।
डीएनबी डॉक्टर भी हड़ताल पर गए
डीएनबी सीपीएस एसोसिएशन ने सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के हड़ताल में शामिल होने की सूचना बुधवार दोपहर को जिला अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव को भेज दी है। इससे अब जेपी अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए अलग – अलग मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे इंटर्न डॉक्टर्स ही बचे हें।
अपडेटस…
- इंदौर: इंदौर में कलेक्टर इलैया राजा T ने मोर्चा संभाल लिया है। वे PC सेठी हास्पिटल पहुंचे। आयुष डॉक्टरों को तैनात किया गया है। सभी सरकारी अस्पतालों में ADM, SDM एवं अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट भेजे गए हैं। यह मॉनिटरिंग कर रहे हैं। प्रशासन ने दावा किया है कि किसी भी मरीज को बगैर इलाज वापस नहीं जाने दिया गया है। एम्बुलेंस भी तैनात है। कलेक्टर ने पांच अपर कलेक्टरों को शहर के 6 बड़े अस्पतालों में तैनात किया है। इसमें अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर को पीसी सेठी और बाणगंगा अस्पताल, अजय देव शर्मा को एमवाय, वंदना शर्मा को मांगीलाल चुरिया अस्पताल, सपना लोवंशी को हुकुमचंद अस्पताल और राधेश्याम मंडलोई को जिला अस्पताल का जिम्मा सौंपा है।
- भोपाल: हमीदिया अस्पताल में 150 निजी डॉक्टर की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके अतिरिक्त चिरायु, आरकेडीएफ, जेके अस्पताल आदि में अतिरिक्त 1500 बेड की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में मरीजों को आवश्यकता होने पर उन्हें निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया जा सके। गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में 32 और जबलपुर में 50 मरीजों के रूटीन ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। हमीदिया से अब तक 9 गंभीर मरीजों को शिफ्ट किया जा चुका है। कुल 40 मरीज शिफ्ट किए जा रहे हैं।
- जबलपुर : नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के करीब 450 डॉक्टरों समेत जिला अस्पताल, लेडी एल्गिन और स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ 180 डॉक्टर भी हड़ताल पर हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में जरूर इलाज नहीं करेंगे, लेकिन अगर कोई गंभीर मरीज आता है जिसकी हमारे इलाज न करने से मौत हो सकती है तो उसका इलाज हम निश्चित रूप से करेंगे। सिविल सर्जन डॉ. मनीष मिश्रा ने वैकल्पिक व्यवस्था करने का दावा किया है। इमरजेंसी, ट्रॉमा और ICU में एनएचएम, रिटायर्ड और आयुष डॉक्टरों को तैनात किया है। कमिश्नर अभय वर्मा ने डॉक्टरों के अवकाश कैंसिल कर दिए हैं। जबलपुर मेडिकल कालेज में 42 और जिला अस्पताल में 8 ऑपरेशन होने थे, जिन्हे आज टाल दिया गया।
- ग्वालियर: गजराराजा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अक्षय निगम ने बताया कि हड़ताल में जयारोग्य चिकित्सालय ग्रुप में कार्यरत 350 डॉक्टर शामिल हुए। इमरजेंसी और ट्रामा यूनिट में 30 आयुष डॉक्टर्स तैनात किए हैं। अस्पताल में भर्ती भिंड गोहद निवासी हरदीप सिंह की आंखों का ऑपरेशन होना था, लेकिन दो बार डेट मिलने के बाद भी ऑपरेशन नहीं हो सका। पहले 18 अप्रैल और 2 मई को डेट मिली थी। अब डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हो जाने के कारण वह अस्पताल से खुद ही डिस्चार्ज होकर अपने घर जा रहे हैं। इनको लगता है कि अनिश्चितकालीन हड़ताल है तो फिलहाल इनका ऑपरेशन संभव नहीं है।
- नर्मदापुरम: हड़ताल को देखते हुए कलेक्टर सहित आला अधिकारी अस्पताल पहुंचे और व्यवस्थाओं को देखा। अपर कलेक्टर 1 घंटे से अस्पताल में मौजूद रहे। संविदा डॉक्टर्स और मेडिकल स्टूडेंट्स को बुलाया। सिविल सर्जन और CMHO स्वयं देखेंगे मरीज।
- खंडवा: मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में ऑपरेशन नहीं होंगे। सिर्फ महिलाओं की सीजेरियन, नार्मल डिलेवरी और मेडिसिन विभाग में प्राइवेट डॉक्टर, जिला अस्पताल के बंधपत्र और मेडिकल कॉलेज के सीनियर एवं जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर्स मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहेंगे। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में जरूर डॉक्टर्स न होने से समस्या आएगी। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अनंत पंवार के अनुसार, डॉक्टर्स के काम बंद हड़ताल के कारण कॉलेज के एसआर और जेआर भी ड्यूटी करेंगे। सीएमएचओ स्तर से भी डॉक्टर्स की पूर्ति के लिए व्यवस्था की जा रही है।
- छिंदवाड़ा: कलेक्टर शीतला पटले ने बताया कि ओपीडी सहित अन्य इमरजेंसी सेवाओं के लिए एनआरएचएम, सीनियर डॉक्टर्स सहित आयुष के डॉक्टर्स द्वारा ओपीडी, गायनिक, सर्जिकल और एसएनसीयू वार्ड में इमरजेंसी के लिए रोटेशन के तौर पर 63 डॉक्टर्स सेवाए दे रहे हैं। मंगलवार रात को हादसे का शिकार हुए घायलों को अब तक इलाज नहीं मिल रहा है। डोरिया खेड़ा निवासी सुरेश भलावी का आरोप है कि उनके भाई आकाश भलावी को कल रात 3 बजे से अस्पताल में एडमिट किया गया है, लेकिन अभी तक उपचार नहीं मिला है।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में टाले गए मरीजों के ऑपरेशन
सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डीन से मिली रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में सबसे ज्यादा 42 सर्जरी जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में टाली गई। जबकि सबसे कम 2 ऑपरेशन राजमाता विजयराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में स्थगित की गई। वहीं विदिशा के मेडिकल कॉलेज में 35, भोपाल के जीएमसी में 32, ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में 26 और इंदौर में एमजीएम में 15 मरीजों के ऑपरेशन डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण टाल दिए गए।
हड़ताल के चलते प्लान नहीं की सर्जरी
प्रदेश के रतलाम और खंडवा के सरकारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बुधवार से शुरू हो रही डॉक्टर्स की हड़ताल के चलते बुधवार को एक भी मरीज की सर्जरी प्लान नहीं की। सरकारी मेडिकल कॉलेज खंडवा के डीन डॉ. अनंत पंवार ने बताया कि एनीस्थेटिक की कमी के कारण मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सप्ताह में तीन दिन सर्जरी होती है। बुधवार को सर्जरी का दिन नहीं था। इस कारण आज एक भी मरीज की सर्जरी प्लान नहीं की गई। वहीं सरकारी मेडिकल कॉलेज रतलाम के अफसरों ने बताया कि सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 15 सर्जरी होती हैं, लेकिन बुधवार को डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण एक भी मरीज की सर्जरी प्लान नहीं की गई थी। इस कारण अस्पताल में एक भी मरीज की सर्जरी नहीं टाली गई।
भोपाल अपडेट्स-अस्पताल में मरीज परेशान
- इलाज के लिए वार्ड दर वार्ड भटक रहा हूं: चंदेरी से आए उदय कोली का पड़ौसी से झगड़ा हो गया था। उदय के बाएं हाथ में फ्रेक्चर है और उनके भाई हरगोविंद को सिर और पसलियों में चोट लगी हुई है। उन्हें चंदेरी जिला अस्पताल से हमीदिया अस्पताल रैफर किया गया। बुधवार सुबह 8 बजे उदय कोली अपने भाई हरगोविंद के साथ हमीदिया अस्पताल पहुंच गए। लेकिन, अस्पताल में दोपहर 11.30 बजे तक उदय और हरगोविंद को इलाज नहीं मिला। पूछने पर उदय ने बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने हड्डी रोग विभाग में जाने को कहा है। तब से हड्डी रोग विभाग खोज रहा हूं। जिस वार्ड में जाता हूं, वह दूसरी ओर हड्डी रोग विभाग होना बता देता है। लेकिन, इलाज देने को कोई तैयार नहीं है।
- बच्चे का ईको कराने एक घंटे तक किया इंतजार: अस्पताल के शिशु रोग विभाग में भर्ती मनदीप को डॉक्टर्स ने हार्ट की ईको कराने की सलाह दी है। मनदीप की मां रीना ने बताया कि वह बेटा आक्सीजन सपोर्ट पर है। वह हमीदिया अस्पताल के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के बाहर सुबह 10.30 बजे पहुंच गई थी। लेकिन, दोपहर 11.30 बजे तक बच्चे की ईको जांच नहीं हो सकी। इतना ही नहीं रेडियोडायग्नोसिस विभाग के कर्मचारी बच्चे की ईको जांच कब होगी ? इस बारे में कुछ बता भी नहीं रहे हैं।
- दवा काउंटर पर जहां लंबी लाइन होती थी … आज वहां सन्नाटा: हमीदिया अस्पताल की पुरानी केजुअल्टी बिल्ड़िंग में ओपीडी मरीजों के लिए दवा काउंटर बनाए गए हैं। सामान्य दिनों में इन काउंटर्स पर दोपहर 2 बजे तक मरीजों और उनके परिजनों की लंबी लाइन लगी रहती थी। लेकिन, बुधवार को इन दवा काउंटर्स के सामने सन्नाटा है। इसकी वजह डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण अस्पताल की ओपीडी में सामान्य दिनों की तुलना में 20 प्रतिशत मरीज ही पहुंचना है।
- दोपहर 12 बजे तक केवल 345 मरीज ही ओपीडी में पहुंचे: हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में बुधवार को दोपहर 12 बजे तक अलग – अलग बीमारियों के 345 मरीज इलाज और जांच कराने पहुंचे। जबकि सामान्य दिनों में अस्पताल की ओपीडी में सुबह 9 से दोपहर 12 बजे के बीच 1200 से 1400 मरीज अपनी बीमारी की जांच और इलाज कराने पहुंचते थे।
- व्हील चेयर पर पेशेंट को परिजन ले जा रहे जांच कराने: गांधी नगर महावीर बस्ती की रहने वाली रानी केवट किडनी रोगी है। वह दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। बुधवार सुबह 11 बजे रानी केवट को उनके परिजन व्हील चेयर पर कमला नेहरू गैस राहत अस्पताल बिल्डिंग में संचालित रेडियो डायग्नोसिस विभाग में सोनोग्राफी कराने के लिए ले जाते हुए मिले।
प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल बोले- परिस्थितियों में बदलाव नहीं आया
प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा- आज 3 मई हो गई है। आज हमारी हड़ताल का पहला दिन है। 17 फरवरी को हमने मंत्री, मुख्यमंत्री के आश्वासन पर हड़ताल स्थगित की थी, लेकिन उस दिन से आज तक कोई परिस्थिति में बदलाव नहीं आया। ऐसा लग रहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने हमारे विभाग को, डॉक्टरों को बंधक बना रखा है। ऐसा लग रहा है हमारे मंत्री, मुख्यमंत्री की मंशाओं के बावजूद वो निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।
हमारी जायज मांग से कोई वित्तीय भार भी नहीं आ रहा है। उस दूर सुदूर गांव में बैठे मेडिकल ऑफिसर, बॉन्डेड, संविदा डॉक्टरों की ये मांग है। जो लगातार इमरजेंसी ड्यूटी करते हैं। जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है वहां डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। हमारा ये अनुरोध है कि मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करके प्रशासनिक अधिकारियों के शिकंजे से बाहर आकर जनता और डॉक्टरों के हित में निर्णय लें।
भोपाल में प्राइवेट अस्पतालों से मांगी जानकारी
भोपाल में जेपी अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि 6 जूनियर डॉक्टर (डीएनबी कोर्स) और 6 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर्स की ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा, आयुष डॉक्टर्स की ड्यूटी अलग – अलग वार्ड में लगाई है। इसके अलावा, सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों के स्टाफ और वहां की व्यवस्था की जानकारी भी मंगवाई है। प्राइवेट अस्पतालों से उनके यहां उपलब्ध डॉक्टर, उनके नाम, फोन नंबर मांगे हैं। आईसीयू, जनरल और एचडीयू में खाली बेड्स की संख्या भी मांगी है। इस संबंध में सभी प्राइवेट अस्पतालों को लेटर लिखा है।
इससे पहले, मंगलवार को सरकारी डॉक्टर्स सुबह 11 बजे से 2 बजे तक हड़ताल पर रहे। उन्होंने ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) और आईपीडी (इन पेशेंट डिपार्टमेंट) भी बंद कर दी थी। समयबद्ध क्रमोन्नति, पुरानी पेंशन और मेडिकल डिपार्टमेंट्स के तकनीकी मामलों में प्रशासनिक दखल को खत्म किए जाने की उनकी मांग है।
भोपाल में मरीजों के लिए ये हो सकते हैं विकल्प
राजधानी में गांधी मेडिकल कॉलेज, हमीदिया हॉस्पिटल, जेपी हॉस्पिटल, काटजू हॉस्पिटल, सिविल हॉस्पिटल बैरागढ़, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिसरोद के डॉक्टर्स भी हड़ताल पर रहेंगे। ऐसे में गंभीर बीमार मरीजों के लिए यह विकल्प भी हो सकते हैं। वे यहां जाकर इलाज करा सकते हैं।
- ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स)
- भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
- रेलवे हॉस्पिटल
- कस्तूरबा हॉस्पिटल, भेल
- प्राइवेट हॉस्पिटल
मांग पत्र सरकार को सौंपा
मप्र शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ के संरक्षक डॉ. राकेश मालवीय का कहना है कि सरकार को हमने मांग पत्र सौंप दिया है।
डॉक्टरों की ये हैं मांगें…
- केंद्र, बिहार व अन्य राज्यों की तरह प्रदेश के डॉक्टर्स के लिए DACP योजना का प्रावधान।
- स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं ईएसआई की वर्षों से लंबित विभागीय विसंगतियां दूर हों।
- चिकित्सकीय विभागों में तकनीकी विषयों पर प्रशासनिक अधिकारियों का हस्तक्षेप दूर किया जाए।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत संविदा चिकित्सकों (MBBS) की MPPSC के माध्यम से की जाने वाली नियुक्ति / चयन प्रक्रिया में प्रतिशत परिधि को समाप्त कर संशोधन किया जाए।
- जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के ग्रेजुएशन के बाद ग्रामीण सेवा बॉन्ड राशि और ट्यूशन फीस जो कि देश में सर्वाधिक है, को कम किया जाए।
- विभाग में कार्यरत समस्त बंधपत्र डॉक्टरों का वेतन समकक्ष संविदा डॉक्टरों के समान किया जाए।
क्या है DACP
डीएसीपी के जरिए डॉक्टरों की समय-समय पर पदोन्नति होती है। वेतनवृद्धि और अच्छा करियर बनाने के लिए DACP में बेहतर अवसर मिलते हैं। ये पॉलिसी साल 2008 के बाद कई राज्यों में लागू हो चुकी है, जबकि, 14 साल के बाद भी मध्य प्रदेश में इसे लागू नहीं किया गया है। इससे डॉक्टरों में नाराजगी है।



