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मध्यप्रदेश में हर दिन 2277 बेरोजगार, सियासी फोकस में ऐसे 3.25 करोड़ लोग, विधानसभा चुनाव में यही बड़ा मुद्दा

न्यूज़ डेस्क :

मध्यप्रदेश में नौकरियों की कितनी मारामारी है, इसका अंदाजा इन आंकड़ों से लगा लें। इस साल 6000 पटवारियों की भर्ती निकली है। परीक्षा के लिए 12.80 लाख बेरोजगारों ने आवेदन किया है। इनमें भी 4 लाख इंजीनियर, एमबीए पासआउट और पीएचडी धारक हैं। दूसरा बड़ा आंकड़ा। जिला रोजगार दफ्तरों में इस समय 30.64 लाख बेरोजगार रजिस्टर्ड हैं और हर दिन ऐसे 2277 युवा रोजगार दफ्तरों से जुड़ रहे हैं। इनमें भी ज्यादातर ग्रेजुएट हैं। इन आंकड़ों से ये तो साफ है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है, क्योंकि भाजपा-कांग्रेस दोनों को पता है कि 18 से 45 साल तक के ये सवा तीन करोड़ वोटर सत्ता से बेदखल करने का माद्दा रखते हैं।

शिवराज सरकार ने 2018 से पहले निजी क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगों में 50% स्थानीय नौकरी अनिवार्य की थी। इसके बाद आई कमलनाथ सरकार ने इसे बढ़ाकर 70% कर दिया था। इन घोषणाओं के नतीजे अब तक नहीं मिले हैं। फिर सत्ता में आई शिवराज सरकार ने अब अप्रेंटिसशिप के लिए युवाओं को 8000 रु. स्टायपेंड देने की घोषणा की है। एक लाख भर्तियां भी कर रही है। जबकि कांग्रेस भत्ता देने का वादा कर रही है।

जब-जब चुनाव करीब आए, नौकरियां भी निकल आईं

कर्मचारी चयन मंडल ने 10 साल में एक लाख 70 हजार 726 पदों के लिए 77 भर्ती परीक्षाएं कराईं। इनमें से करीब 98 हजार परीक्षाएं विधानसभा व लोकसभा चुनाव के आसपास ही निकलीं। 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले एक लाख से अधिक भर्तियां हो रही हैं। दावा है कि यह अगस्त 2023 तक हो जाएंगी।

बेरोजगारों का सरकारी पोर्टल- कमलनाथ सरकार और शिवराज सरकार

वर्ष 2018 2019 2020 2021 2022
सालाना पंजीयन 7,46,818 8,46,709 6,11,784 12,36,482 7,13,769
कुल बेरोजगार 26,81,68 31,54,710 24,72,492 30,13,107 30,64,331
निजी क्षेत्र में नौकरी 1,76,575 4,219 80,717 1,21,178 68,098

समिट, निवेश और रोजगार

तीसरी- अक्टूबर 2012
425 एमओयू हुए और 26,054.85 करोड़ का निवेश आया। कुल 31 हजार 530 को रोजगार िमला।

चौथी- अक्टूबर 2014
3,160 एमओयू हुए और 49,272.5 करोड़ का निवेश आया। रोजगार 38 हजार 750 को मिला।

पांचवी- अक्टूबर 2016
2,635 एमओयू हुए और 32,597.66 करोड़ का निवेश आया। रोजगार 92 हजार 700 को मिला।

15 साल में 59 बड़ी कंपनियों ने दी सिर्फ डेढ़ लाख नौकरी

  1. 2018 में हर साल एक हजार रोजगार दिलाने के नाम पर 15 जिलों के रोजगार दफ्तरों को पीपीपी मोड पर निजी कंपनी को दिया गया था। चार साल इन्हें चलाया गया, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हाल ही में कंपनी से एग्रीमेंट खत्म कर दिया गया है।
  2. शिवराज सरकार में हुई 6 इन्वेस्टर समिट के अलावा 2004 से लेकर 2022 तक 2,22,004.41 करोड़ का निवेश हुआ और 2 लाख 91 हजार 835 को रोजगार मिला है। सौ करोड़ से ज्यादा का निवेश करने वाली 59 बड़ी कंपनियों ने 15 वर्षों में सिर्फ 1 लाख 40 हजार 698 नौकरी दी है।

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