MP की नई सरकार में ‘लाड़ली बहना’ घटीं: सरकार ने बताए 3 कारण, कांग्रेस ने कहा-चुनावी पाखंड था, जिसका रंग उतरने लगा

भोपाल डेस्क :
मध्यप्रदेश में नई सरकार में पहली बार बुधवार को लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपए आए। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगल क्लिक पर 1.29 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1576.61 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए।
नई सरकार में जनवरी में 1.57 लाख लाड़ली बहना घट गईं। दिसंबर में 1 करोड़ 30 लाख 84 हजार 756 हितग्राही थी। जनवरी में घटकर 1 करोड़ 29 लाख 26 हजार 835 हैं।
ओवरऑल देखें तो अक्टूबर महीने तक 1 करोड़ 31 लाख 2 हजार 182 हितग्राही थीं, जो घटकर अब 1 करोड़ 29 लाख 26 हजार 835 रह गई। यानी योजना में कुल 1 लाख 75 हजार 347 महिलाओं की संख्या घटी हैं।

हितग्राहियों की संख्या घटने के पीछे तीन कारण सामने आए हैं। पहला मौत, दूसरा स्वेच्छा से योजना छोड़े जाना, तीसरा उम्र 60 साल से अधिक होना।
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश की लाखों लाड़ली बहनों से झूठ बोल कर वोट ले लिए और अब उन्हीं में से 2 लाख बहनों की छंटनी कर दी।
विभाग ने संख्या घटने की बताई 3 वजह

महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक डॉ. रामराव भोसले के अनुसार…
- योजना शुरू होने के बाद कई पात्र महिलाओं की मौत हुई है। उनके नाम काटे गए। हालांकि यह संख्या कम है।
- योजना में स्पष्ट प्रावधान है कि 60 साल तक की उम्र में ही योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए साठ साल से अधिक उम्र होने पर कट आफ डेट एक जनवरी तय की गई है। इसलिए पिछले 6 माह में जो महिलाएं 60 साल की उम्र पूरी कर चुकी हैं, उनके नाम एक जनवरी 2024 की स्थिति में योजना से बाहर कर दिए गए।
- जिनके अकाउंट नंबर बदल गए या जिन्होंने योजना का लाभ लेने से मना किया गया, उनके भी नाम सूची से बाहर हुए हैं।
नेता प्रतिपक्ष बोले- नए CM क्यों चाहेंगे कर्ज लेकर ढोते रहे
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुधवार को X पर लिखा- कर्ज का बोझ नहीं ढो पा रही विज्ञापन से बनी भाजपा सरकार ने प्रदेश की लाखों लाड़ली बहनों से झूठ बोल कर वोट ले लिया। अब उन्हीं में से 2 लाख बहनों की छंटनी कर दी।
जब सितंबर में शिवराज मुख्यमंत्री थे, तब लाड़ली बहनों की संख्या 1.31 करोड़ थी। अब नए CM मोहन यादव ने इस संख्या को छांटकर 1.29 करोड़ कर दिया। यानी 2 लाख तो नई सरकार बनते ही घटा दी। सरकारी विज्ञापन इसका प्रमाण है, जनता खुद देखे लोकसभा चुनाव के बाद ये संख्या कितनी बचेगी, ये तो नए CM मोहन यादव ही तय करंगे।
नए CM क्यों चाहेंगे कि लाड़ली बहना के ‘प्यारे भैया’ शिवराज जी ही बने रहें और मोहन यादव आपकी योजना को कर्ज लेकर ढोते रहें। लाड़ली बहना योजना को लेकर लोगों की शंका गलत नहीं है कि CM बदलते ही इस योजना पर तलवार लटकी है। सरकार भले भाजपा की है, लेकिन CM का चेहरा तो नया है। अब लाड़ली बहनों को भी समझ आ रहा है कि ये बीजेपी का चुनावी पाखंड था, जिसका रंग उतरने लगा है।

‘झूठ की फैक्ट्री से फेक प्रोडक्ट निकालने में कांग्रेसी बहुत फास्ट’
बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा- झूठ की फैक्ट्री से फेक प्रोडक्ट निकालने में कांग्रेसी बहुत फास्ट हैं। उमंग सिंघार जी, कम से कम नेता प्रतिपक्ष की गरिमा के अनुरूप जांच परखकर तो आप प्रतिक्रिया देते.. लाड़ली बहनों की संख्या कम होने की वास्तविक स्थिति तो पता कर लेते।

आशीष अग्रवाल ने विभाग के जारी किए आंकड़े भी शेयर किए। उन्होंने लिखा- पंजीकृत आवेदन की सूची में किसी भी प्रकार की काट छांट नहीं की गई, न ही किसी हितग्राही को योजना से बाहर किया गया है। संख्या में जो अंतर आ रहा है वह मृत्यु, लाभ परित्याग, उम्र अधिक होने से पात्रता सीमा से बाहर होने के कारण आ रहा है। इसलिए आपका ट्वीट पूर्णतः भ्रामक है। आपको झूठ फैलाने पर माफी मांगनी चाहिए और लाड़ली बहनों के खाते में राशि पहुंचाने के लिए भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहिए।



