मुख्यमंत्री आज 11 दिन में दूसरी बार ग्वालियर में: डॉ. मोहन यादव 10 हजार करोड़ के 7 प्रोजेक्टों में देरी की करेंगे समीक्षा

भोपाल डेस्क :
25 दिसंबर के बाद 11 दिन में दूसरी बार ग्वालियर आ रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ग्वालियर आ रहे हैं। वह यहां ग्वालियर संभाग के जिला, पुलिस, नगर निगम व अन्य विभागों के अधिकारियों से विकास और कानून व्यवस्था पर चर्चा करेंगे। गुरुवार को शाम को वह 2 अलग-अलग बैठक लेंगे। जिसमें से शाम 5.10 बजे की बैठक में मुख्यमंत्री सिर्फ कानून व्यवस्था को लेकर समीक्षा करेंगे।
इसके बाद 6.10 बजे की बैठक में विकास कार्य के प्रोजेक्टों की स्थिति जानेंगे। मुख्यमंत्री के साथ बैठक में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे। उक्त बैठक में अधिकारी 10 हजार करोड़ से ज्यादा के विकास कार्यों का प्रजेंटेशन दिखाएंगे।
कई बड़े प्रोजेक्टों में काम देरी से होने पर अफसरों ने विधानसभा चुनाव का बहाना तैयार किया है। कुछ अधिकारियों ने चर्चा में स्वीकार किया कि आसपास बाढ़ में बहे पुल, एलिवेटेड रोड, आरओबी, स्टेशन पुनर्विकास आदि कई प्रोजेक्ट में देरी हो रही है। देर शाम तक 45-50 नेताओं के ऐसे नामों को लेकर भाजपा संगठन व अधिकारियों के बीच माथापच्ची चलती रही। जिन्हें सीएम के साथ अलग-अलग मंच पर बैठना था।
लक्ष्य से पिछड़े, शहर के इन बड़े प्रोजेक्टों पर चर्चा
एलिवेटेड रोड: काम 30 %
करीब 1320 करोड़ रुपए की लागत से स्वर्ण रेखा नदी पर दो चरण में तैयार होने वाली एलिवेटेड रोड में पहले चरण का काम अभी 30% ही पूरा हो पाया है।
रेलवे स्टेशन: काम 12 %
534.70 करोड़ की लागत से रेलवे स्टेशन पुनर्विकास प्रोजेक्ट पर काम काफी धीमा चल रहा है। अब तक 12% काम हो पाया है।
थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण: काम- 30 %
हाउसिंग बोर्ड लगभग 116 करोड़ रुपए की लागत से थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण प्रोजेक्ट पर काम अभी 30% ही हो सका है।
अमृत 2: काम- शुरू नहीं
अमृत-2 प्रोजेक्ट के तहत चंबल नदी से ग्वालियर तक पानी लाना है। इस प्रोजेक्ट पर लागत- 916 करोड़ रुपए आएगी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
आईएसबीटी: काम 65 %
मुरैना लिंक रोड पर 64.22 करोड़ की लागत से आईएसबीटी का काम 65% हो पाया है।
मोनोपोल: काम-55 %
लगभग 200 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट का काम जमीन को लेकर अटका हुआ है। अब तक 55% काम ही हो सका है।
आरओबी: काम-65 %
नीड्म रोड के बीच निर्माणाधीन आरओबी सबसे देरी से चल रहा प्रोजेक्ट है। यह प्रोजेक्ट 2019 में पूरा होना था, लेकिन 4 साल में 65% काम हो सका है।



