ब्रेकिंग न्यूज़ – मध्यप्रदेश में सरकारी डॉक्टरों ने वापस ली हड़ताल: इलाज नहीं मिलने पर मरीज ने तोड़ा दम, हाईकोर्ट के आदेश के बाद काम पर लौटेंगे डॉक्टर्स
भोपाल डेस्क :
मध्यप्रदेश में सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है। डॉक्टरों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद काम पर लौटने का फैसला लिया है। मप्र शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय ने इसकी पुष्टी की है। उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं। अभी कोर्ट का आदेश नहीं मिला है। आदेश को पूरा अध्ययन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
इससे पहले बुधवार को डॉक्टर्स की हड़ताल के चलते प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई। क्योंकि प्रदेश के करीब 15 हजार सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस दौरान ग्वालियर में समय पर इलाज नहीं मिलने पर एक मरीज की मौत हो गई। इधर सरकार वैकल्पिक व्यवस्था में जुटी रही। साथ ही हड़ताली डॉक्टरों को मनाने की भी कोशिश भी होती रही। इधर हाईकोर्ट ने हड़ताल पर सख्त रुख अपनाया और डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध बताते हुए तत्काल काम पर लौटने का आदेश दिया।
ग्वालियर में इलाज नहीं मिलने पर मरीज ने तोड़ा दम
ग्वालियर में डॉक्टरों की हड़ताल के पहले ही दिन इलाज नहीं मिलने पर एक मरीज ने दम तोड़ दिया है। 62 साल के अमर सिंह जाटव निवासी किलागेट को सांस की बीमारी थी। वह एक महीने से जयारोग्य हॉस्पिटल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती थे। बुधवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, परिजन डॉक्टरों के पास पहुंचे, लेकिन किसी डॉक्टर ने आकर जांच तक नहीं की। कुछ देर बाद अमर सिंह ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।
हड़ताल पर हाईकोर्ट, डॉक्टर्स और सरकार का क्या है रुख ?
हाईकोर्ट ने हड़ताल को बताया अवैध
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में जारी डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध ठहराया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि हड़ताल पर बैठे सभी डॉक्टर तत्काल काम पर लौटे। डॉक्टर अस्पताल में मौजूद अंतिम मरीज का भी इलाज करें। हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि आगे से बिना अनुमति हड़ताल नहीं करें। भविष्य में टोकन स्ट्राइक को भी हाईकोर्ट ने अवैध बताया। याचिका जबलपुर के पूर्व पार्षद इंद्रजीत कुंवर पाल सिंह ने लगाई थी। जिस पर चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई।
डॉक्टर बोले-मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे
मप्र शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय ने कहा कि पिछले 10 साल से अपने मुद्दों और परेशानियों को लेकर सरकार के पास जा रहे हैं। कभी-कभी तो सरकार के प्रतिनिधि वर्षों तक बात नहीं करते। जब हम आंदोलन करते हैं, तो वो बात करते हैं। हड़ताल खत्म कराने के लिए हर बार आश्वासन का झुनझुना पकड़ा देते हैं। आज फिर से डॉक्टर्स एकजुट हुए हैं। उद्देश्य यही है कि जब तक मांगों को लेकर आदेश जारी नहीं हो जाते, तब तक पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश पर उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश के संबंध में संगठन पदाधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई है। उन्होंने डॉक्टरी काम में अधिकारियों के दखल पर नाराजगी भी जताई।
सरकार हड़ताली डॉक्टर्स से बातचीत में जुटी
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने बुधवार को कहा, सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों से बातचीत चल रही है। कई मुद्दों पर सहमति भी बनी है। एक-दो मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर सहमति नहीं बन पाई है। डॉक्टरों से अनुरोध है कि स्ट्राइक कॉल ऑफ करें। वैसे भी ये मानवता से जुड़ा हुआ मामला है। समाज में भी डॉक्टरों को भगवान के रूप में मानते हैं। इसलिए उनको स्ट्राइक वापस लेना चाहिए।’
इससे पहले हड़ताल खत्म कराने के लिए मंगलवार रात करीब 8 बजे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के आवास पर बैठक हुई। इसमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और चिकित्सक संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। करीब एक घंटे चली बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई।
हड़ताल पर हैं 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर्स
मध्यप्रदेश के 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर बुधवार से हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल का असर भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दिखाई दे रहा है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज ज्यादा परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि प्रदेश के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भर्ती 228 मरीजों के ऑपरेशन बुधवार को टाल दिए गए हैं।
डॉक्टरों ने केंद्र सरकार के समान डीएसीपी (डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोसेस) योजना लागू करने समेत अपनी अन्य मांगों को पूरा करने की डिमांड की है।
सरकारी डॉक्टर्स के समर्थन में उतरे जूनियर डॉक्टर
मध्यप्रदेश मेडिकल टीचर एसोसिएशन और चिकित्सक संघ के आह्वान पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन भी हड़ताल पर है। एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि इन मांगों को लेकर जनवरी-फरवरी में भी हड़ताल की गई थी। सरकार ने कमेटी बनाई थी, लेकिन मसौदे को आगे नहीं बढ़ाया। जेडीए की मांग स्टाइपेंड बढ़ाने की है। प्रदेश के जिला अस्पतालों में तैनात किए गए जूनियर डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था नहीं की गई है। ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मांग भी पेंडिंग है। प्रमोशन टाइम पर देना भी प्रमुख मांगों में शामिल है।
डीएनबी डॉक्टरों ने भी काम बंद किया
भोपाल में डीएनबी सीपीएस एसोसिएशन ने भी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के हड़ताल में शामिल होने की सूचना बुधवार दोपहर जिला अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव को भेज दी है। इसके बाद अब जेपी अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए अलग-अलग मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे इंटर्न डॉक्टर्स ही बचे हैं।
संभागायुक्त ने हड़ताल कर रहे डॉक्टर को हॉस्पिटल बिल्डिंग से बाहर किया
भोपाल में मप्र शासकीय स्वशासी संघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय को संभागायुक्त माल सिंह ने हमीदिया अस्पताल की बिल्डिंग से बाहर कर दिया। डॉ. मालवीय, हॉस्पिटल बिल्डिंग में बने वार्ड में ड्यूटी कर रहे साथी डॉक्टर्स से चर्चा करने पहुंचे थे। तभी संभागायुक्त माल सिंह, कलेक्टर आशीष सिंह और जीएमसी डीन डॉ. अरविंद राय, हॉस्पिटल का राउंड लेने वार्ड में पहुंच गए। जहां डॉक्टर्स की हड़ताल की अगुवाई कर रहे डॉ. राकेश मालवीय को वार्ड में देख वो नाराज हो गए।
भोपाल में निजी डॉक्टरों की ली जा रही सेवाएं
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 150 निजी डॉक्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं। चिरायु, आरकेडीएफ, जेके आदि अस्पतालों में अतिरिक्त 1500 बेड की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया जा सकता है। गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में 32 मरीजों के रूटीन ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। हमीदिया से अब तक 9 गंभीर मरीजों को शिफ्ट किया जा चुका है। कुल 40 मरीज शिफ्ट किए जा रहे हैं।
इंदौर में आयुष डॉक्टरों को किया गया तैनात
इंदौर में सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल के बाद अस्पतालों में आयुष डॉक्टरों की तैनाती की गई है। खुद कलेक्टर इलैया राजा टी PC सेठी हास्पिटल पहुंचे और व्यवस्थाएं देखी। इसके अलावा ADM, SDM और अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट अलग अलग सरकारी अस्पतालों के दौरे पर भेजे गए। प्रशासन ने दावा किया है कि किसी भी मरीज को बगैर इलाज वापस नहीं जाने दिया गया है। एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 5 अपर कलेक्टरों को शहर के 6 बड़े अस्पतालों में तैनात किया है। अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर को पीसी सेठी और बाणगंगा अस्पताल, अजय देव शर्मा को एमवाय, वंदना शर्मा को मांगीलाल चुरिया अस्पताल, सपना लोवंशी को हुकुमचंद अस्पताल और राधेश्याम मंडलोई को जिला अस्पताल का जिम्मा सौंपा गया है।
जबलपुर में करीब 50 मरीजों के रुटिन ऑपरेशन टाले
जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के करीब 450 डॉक्टरों समेत जिला अस्पताल, लेडी एल्गिन और स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ 180 डॉक्टर भी हड़ताल पर हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में इलाज नहीं करेंगे, लेकिन अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसका उपचार हम निश्चित रूप से करेंगे। सिविल सर्जन डॉ. मनीष मिश्रा ने वैकल्पिक व्यवस्था करने का दावा किया है। इमरजेंसी, ट्रॉमा और ICU में एनएचएम, रिटायर्ड और आयुष डॉक्टरों को तैनात किया गया है। कमिश्नर अभय वर्मा ने डॉक्टरों के अवकाश कैंसिल कर दिए हैं। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 42 और जिला अस्पताल में 8 ऑपरेशन होने थे, जिन्हें टाल दिया गया है।
ग्वालियर में मरीजों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना
ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अक्षय निगम ने बताया कि हड़ताल में जयारोग्य चिकित्सालय ग्रुप में कार्यरत 350 डॉक्टर शामिल हैं। इमरजेंसी और ट्रॉमा यूनिट में 30 आयुष डॉक्टर्स तैनात किए गए हैं। अस्पताल में भर्ती भिंड के गोहद निवासी हरदीप सिंह की आंखों का ऑपरेशन दो बार डेट मिलने के बाद भी नहीं हो सका। पहले 18 अप्रैल और फिर 2 मई को डेट मिली थी। अब डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हो जाने के कारण वे अस्पताल से खुद ही डिस्चार्ज होकर घर जा रहे हैं। अनिश्चितकालीन हड़ताल है तो फिलहाल इनका ऑपरेशन संभव नहीं है।



