जिंदगी की कठिन परीक्षा: रात को पिता की हार्ट अटैक से मौत, सुबह बेटे ने दिया पेपर: बेटा बोला- दिल पर पत्थर रखकर पिता का सपना पूरा करने गया था
न्यूज़ डेस्क :
देवास में एक हृदय विदारक घटना घटी। रात में एक निगमकर्मी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। घर में चीख-पुकार मची थी, इस सबके बीच भारी मन से बेटा सुबह परीक्षा देने गया। पेपर देकर लौटा और पिता का अंतिम संस्कार किया। पूछने पर इतना ही कहा- दिल पर पत्थर रखकर पिता का सपना पूरा करने गया था।
जिले के आवास नगर में रहने वाले जगदीश सोलंकी को बुधवार रात 12 बजे हार्ट अटैक आया। वे नगर निगम में प्रभारी सहायक राजस्व निरीक्षक थे। परिवार में पत्नी के अलावा चार बेटियां और एक बेटा है। चारों बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि बेटा देवेंद्र माउंट हायर सेकेंडरी स्कूल का छात्र है।
गणित संकाय से 12वीं कर रहे देवेंद्र का गुरुवार को हिंदी विषय का पेपर था। वह रात में पढ़ाई में जुटा हुआ था। रात 12 बजे पिता को सीने में दर्द उठा। वह कमरे से बाहर आया तो जगदीश की हालत ठीक नहीं थी। कुछ देर बाद जगदीश के शरीर ने हरकत करना बंद कर दिया। वे उन्हें अस्पताल लेकर पहंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पिता की बॉडी घर पर रखी हुई थी और उधर देवेंद्र के पेपर का समय हो रहा था। उसने इतनी दुख की घड़ी में पेपर देने का निर्णय लिया।
विपत्ति कितनी भी आए, उसका डट कर सामना करो
छात्र देवेंद्र ने बताया- पापा अब इस दुनिया में नहीं हैं। सुबह मेरा 12वीं का पेपर था। पापा चाहते थे कि मैं अच्छे नंबरों से पास होऊं। उनके लिए ही दिल पर पत्थर रखकर एग्जाम देने गया। पापा का सपना था कि मैं आर्मी या सिविल सर्विसेस में जाऊं। पेपर अच्छा गया है। आगे कैसे होगा, इस बारे में तो कुछ नहीं पता, लेकिन जो भी होगा, देखा जाएगा। बस अपने दूसरे साथियों को यही कहना चाहूंगा कि विपत्ति कितनी भी आए, उसका डट कर सामना करो। पढ़ाई को अहमियत देना बहुत जरूरी है।
दोस्त अंतिम संस्कार में रहे साथ
दोस्त अमन पांचाल ने बताया कि रात करीब 2 बजे देवेंद्र का कॉल आया और उसने मुझे अंकल के बारे में जानकारी दी। इसके बाद हम दोस्त सुबह उसे लेकर स्कूल पहुंचे और उसने पेपर दिया। पेपर खत्म होने के बाद हम सीधे देवेंद्र के घर पहुंचे और फिर अंतिम संस्कार हुआ।
परीक्षा के दो घंटे बाद ही देवेंद्र को जाने दिया
बीसीएम स्कूल के केंद्राध्यक्ष सुनील पटेल ने बताया कि देवेंद्र गणित विषय का छात्र है। पिता की मौत के बाद भी वह सुबह परीक्षा देने पहुंचा था। माध्यमिक शिक्षा मंडल के ऐसे निर्देश हैं कि परीक्षा शुरू होने के दो घंटे बाद हम परीक्षार्थी को एग्जाम सेंटर से बाहर जाने दे सकते हैं। इस कारण हमने 11 बजे परीक्षा देने के बाद उसे छोड़ दिया था।
मानवता के नाते हमने यह काम किया। उसने अच्छे से पेपर हल किया। यह अन्य बच्चों के लिए एक उदाहरण है। बच्चे के चेहरे से ऐसा लग रहा था कि कुछ हुआ है। पुलिसकर्मी ने हमें इन अनहोनी के बारे में बताया। इसके बाद हमने उसे जाने देने का फैसला लिया।



