सम्मान समारोह : आज मैं जिस मुकाम पर हूं वह मेरे माता पिता के आशीर्वाद और परिवार के सपोर्ट के बिना संभव नहीं था- वीर सिंह धाकड़
आनंदपुर डेस्क :
मैंने भी बचपन से ही इसी सरकारी स्कूल भवन में पांचवी तक की पढ़ाई की है मैंने वह दिन भी देखे हैं की गरीबी क्या होती है माता पिता जिस लगन से अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए आगे बढ़ाते हैं उसी तरह हम सभी का फर्ज भी बनता है कि अपने माता-पिता की इच्छाओं पर खरे उतरे शुरुआत से ही मैंने तय कर लिया था कि मुझे बड़ा मुकाम हासिल करना है प्राइमरी स्कूल के बाद मैंने नवोदय विद्यालय में 12वीं तक की पढ़ाई की मेरी रुचि कानून की पढ़ाई में अधिक थी मैंने उसका इंटरेस्ट एग्जाम भी दिया लेकिन दो बार मैं नाकाम रहा था तीसरे प्रयास में ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी उड़ीसा में कानून की पढ़ाई के लिए अपना स्थान बनाया और वहां से मैं वकील की पढ़ाई कर भोपाल आ गया जहां मैंने पहले ही प्रयास में सिविल जज की परीक्षा पास कर आज यह मुकाम हासिल किया है यह सब मेरे माता पिता के आशीर्वाद और परिवार के सपोर्ट के बिना संभव नहीं हो सकता था यह बात हाल ही में सिविल जज की परीक्षा में चयनित हुए वीरसिंह धाकड़ ने निज ग्राम पंचायत बलरामपुर में सम्मान समारोह में उपस्थित नागरिकों के बीच अपने संबोधन में कही। साथ ही सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए रजत गौढ ने कहा कि पूत सपूत तो का धन संचय का उदाहरण देते हुए कहा कि पूत के लक्षण तो पालने में ही दिख जाते हैं हमारी इस पावन धरा के सपूत भी वीरसिंज धाकड़ ने ग्राम ही नहीं बल्कि पूरी तहसील का नाम रोशन किया है और आज के विद्यार्थियों को उनसे प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। एडवोकेट भैरो सिंह जादौन ने कहा कि वीर सिंह धाकड़ को अब सम्मानों से बचना चाहिए यह आपका पाला अब हम जैसे वकीलों से पड़ेगा। आपको ऐसे सम्मान समारोह से बचकर ही रहना होगा।

सम्मान समारोह के पूर्व मां सरस्वती के छाया चित्र पर उपस्थित सभी अतिथियों ने फूल माला अर्पित कर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जिसमे सरपंच प्रतिनिधि कुंगर लाल धाकड़, जनपद सदस्य अरविन्द कुशवाह , वकील संघ लटेरी , अखिल भारतीय क्षत्रिय धाकड़ महासभा सिरोंज लटेरी, रजत गौड़ , सरदार सिंह कुशवाह, अजित जैन राजनारायण पाराशर, जगमोहन विश्वकर्मा, बाबल सिंह बघेल, धनराज सिंह धाकड़, प्रकाश कुशवाह , नफीस खान, शानदार और भव्य कार्यक्रम का मंच संचालन जन चेतना मंच के जिला अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने और आभार रविशंकर धाकड़ ने व्यक्त किया ।



