विदिशामध्यप्रदेश

अनसुलझे रहस्य:- 2000 वर्ष पुराना ‘राम मोहल्ला’ मंदिर उपेक्षित: गुफाएं, प्राचीन अवशेष

आनंदपुर डेस्क :                                सीताराम वाघेला 

विदिशा जिला मुख्यालय से करीब 123 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत करई खेड़ा अंतर्गत सुमेरपुर और भगवंतपुर गांव के बीच स्थित प्राचीन ‘राम मोहल्ला’ मंदिर इतिहास, आस्था और रहस्यों का अद्भुत संगम है। लगभग 2000 वर्ष पुराना माना जाने वाला यह मंदिर आज भी क्षेत्र में श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इसकी पहचान और संरक्षा दोनों खतरे में हैं।
मंदिर के पुजारी लक्ष्मण दास महाराज बताते हैं कि यहां कोई बस्ती नहीं होने के बावजूद सदियों से लोग पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। करीब 10 वर्ष पहले मंदिर की कृषि भूमि पर मिट्टी कटाव रोकने के लिए मिट्टी डलवाई जा रही थी, तभी जमीन के भीतर प्राचीन मकानों की नींव और अवशेष दिखाई दिए। इस पर भगवंतपुर के शिक्षक प्रेम सिंह ने पुरातत्व विभाग को आवेदन देकर जांच की मांग की थी। उस समय सिरोंज तहसील के एसडीएम और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और खुदाई रुकवाकर जांच कराने का आश्वासन दिया, लेकिन आज तक कोई टीम नहीं पहुंची।
एक रात में बना अधूरा मंदिर:- प्रचलित मान्यता
ग्रामीणों के अनुसार मंदिर का निर्माण एक ही रात में हुआ था, लेकिन पास में हाथ की चक्की चलने की आवाज सुनाई देने पर निर्माण कार्य रोक दिया गया और फिर दोबारा शुरू नहीं हुआ। मंदिर लाल पत्थरों से निर्मित है, जिन्हें बेहद ठंडा और विशेष गुणों वाला माना जाता है।

रहस्यमयी गुफाएं बनीं आकर्षण का केंद्र

मंदिर परिसर में प्राचीन गुफाएं भी मौजूद हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि एक मार्ग देवपुर तक जाता है। संरचना ऐसी है कि ऊपर से प्रवेश करने पर नीचे और नीचे से जाने पर ऊपर मंदिर तक पहुंच जाते हैं। मंदिर की नींव चूना और छोटे पत्थरों से बनी हुई बताई जाती है।

मंदिर में राम-जानकी का दरबार सुसज्जित है तथा बाहर हनुमान जी और भगवान शंकर के छोटे मंदिर स्थापित हैं। पुजारी बताते हैं कि उनके गुरु जी रामजीवन दास महाराज 127 वर्ष की आयु तक जीवित रहे और वे भी इसे अत्यंत प्राचीन स्थल बताते थे।

110 बीघा जमीन पर अतिक्रमण

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर के पास पहले लगभग 110 बीघा जमीन थी, लेकिन समय के साथ उस पर अतिक्रमण हो गया और वर्तमान में केवल 10-11 बीघा भूमि ही बची है। ग्रामीणों का आरोप है कि शेष जमीन पर खुलेआम खेती की जा रही है।

गौसेवा की अनूठी मिसाल

पुजारी लक्ष्मण दास महाराज का गौसेवा से विशेष लगाव रहा है। लगभग दस वर्ष पहले उन्होंने मंदिर परिसर में 70-80 गायों का पालन-पोषण शुरू किया था। सीमित संसाधनों के बावजूद वे स्वयं उनकी सेवा करते थे।
इसी दौरान सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के पदाधिकारी के साथ भारती बेन जोबनपुत्रा वहां पहुंची। उन्होंने एक संत को इतनी बड़ी संख्या में गायों की सेवा करते देख लक्ष्मण दास महाराज से आग्रह किया कि सभी गायों को सद्गुरु नगर स्थित गौशाला में भेज दिया जाए, जहां उनकी बेहतर देखभाल हो सके। विनम्र अनुरोध पर महाराज ने अधिकांश गायों को वहां भिजवा दिया और केवल दो-तीन दूध देने वाली गायें अपने पास रखीं। वर्तमान में मंदिर परिसर में लगभग 5-6 गायों की सेवा की जा रही है।

सामुदायिक भवन पर ताला

मंदिर परिसर में ग्राम पंचायत द्वारा एक सामुदायिक भवन का निर्माण भी कराया गया, लेकिन उस भवन पर सत्संग मंडली ने ताला डाल रखा है। जिनको सिर्फ वही खोलते हैं यदि एक चाबी उसकी पुजारी जी को मिल जाए तो प्रतिदिन धार्मिक आयोजन उसमें किया जा सकते हैं।

संरक्षण की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर का पुरातात्विक सर्वे कराया जाए, अतिक्रमण हटाया जाए और सामुदायिक भवन को उपयोग के लिए खोला जाए। उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे संरक्षित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो सदियों पुरानी यह विरासत धीरे-धीरे नष्ट हो सकती है।

जिला मुख्यालय से दूरी 123 कि.मी.
मुख्य पहचान सिर्फ – *राममौहल्ला मंदिर*
पहुंच मार्ग – पक्की सड़क
जनसंख्या लगभग – सुमेरपुर गांव 750
मुख्य फसल – गेहूं, चना, सोयाबीन, मक्का

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