पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन की पुण्य स्मृति में श्रद्धांजलि सभा: सेवा और अनुशासन की विरासत को किया नमन

आनंदपुर डेस्क सीताराम वाघेला
सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के आनंदपुर स्थित ऑडिटोरियम हॉल में जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय के ट्रस्टी निदेशक, पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन की पुण्य स्मृति में भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के समस्त अधिकारी, चिकित्सक, कर्मचारी और महिला समिति की सदस्याएं उपस्थित रहीं। सभी ने दिवंगत डॉ. जैन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

सभा को संबोधित करते हुए नेत्र चिकित्सालय के मुख्य प्रबंधक मिलिंद रावल ने कहा कि डॉ. जैन का हर व्यक्ति से आत्मीय लगाव था। उनका अनुशासन, कार्य के प्रति निष्ठा और सेवा भाव हम सभी के लिए जीवन भर प्रेरणा स्रोत रहेगा। उन्होंने बताया कि डॉ. जैन की सेवा यात्रा चित्रकूट में एक छोटे से कमरे से शुरू हुई थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने संकल्प, परिश्रम और समर्पण से संस्था को आज विश्व पटल पर स्थापित कर दिया। यह उनकी दूरदर्शिता और कर्मठता का परिणाम है कि आज सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट नेत्र चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम बन चुका है।
डॉ. जैन का जन्म सन् 1940 के दशक में हुआ था। बचपन से ही वे मेधावी और सेवा-भावी प्रवृत्ति के थे। उच्च शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने नेत्र चिकित्सा को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। वे एक प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ के रूप में देश-विदेश में पहचान रखते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा ‘पद्मश्री’ सम्मान से अलंकृत किया गया। उन्होंने हजारों नेत्र रोगियों का निःशुल्क या अत्यंत न्यून शुल्क पर उपचार कर उन्हें नई दृष्टि प्रदान की।

ट्रस्ट के चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र उपाध्याय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. बी.के. जैन और उनके पिता स्वर्गीय गोवर्धन लाल उपाध्याय ने 50 वर्षों से अधिक समय तक ट्रस्ट की सेवा की। जब भी जैन साहब आनंदपुर आते थे, वे नेत्र चिकित्सालय के साथ उपाध्याय परिवार से मिलना नहीं भूलते थे। उनका हर व्यक्ति पर विशेष स्नेह रहता था। आज उनका हमारे बीच न होना एक गहरा आघात है। पहले गोवर्धन लाल उपाध्याय और अब डॉ. जैन—दोनों की कमी संस्था को सदैव खलेगी।
महिला समिति की निदेशक एला बैन जोबनपुत्रा ने कहा कि डॉ. जैन अत्यंत सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने गुरुदेव रणछोड़ दास जी महाराज को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे चाहते तो किसी महानगर में विशाल अस्पताल स्थापित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने सेवा को सर्वोपरि मानते हुए चित्रकूट को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने सिद्ध किया कि यदि सच्ची श्रद्धा और पूर्ण निष्ठा से कार्य किया जाए तो कोई भी स्थान सेवा धाम और तीर्थ स्थल बन सकता है।

डॉ. जैन का निधन हाल ही में हुआ, जिससे चिकित्सा जगत और समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। वे केवल एक चिकित्सक नहीं, बल्कि एक महान शख्सियत, अनुशासनप्रिय प्रशासक और समदृष्टि से सभी को देखने वाले मार्गदर्शक थे।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे डॉ. बी.के. जैन के बताए मार्ग पर चलते हुए सेवा कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। कार्यक्रम का समापन गुरुदेव की प्रार्थना “हे प्रभु अश मन कर दो” के साथ हुआ।
डॉ. जैन का संपूर्ण जीवन समाज सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों की मिसाल रहा है। उनकी पुण्य स्मृति संस्था और समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
इस अवसर पर ट्रस्ट के समस्त कर्मचारी अधिकारी ट्रस्टी गण उपस्थित रहे।



