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विदिशा संग्रहालय की बढ़ाएगी शान बढ़ाएगी हैदरगढ़ किले की 17वीं शताब्दी की तोप: चांदी समझकर इसकी एक तरफ की खूंटी ले गए चोर

विदिशा डेस्क :

जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर हैदरगढ़ किले की 17वीं शताब्दी की तोप अब विदिशा के जिला पुरातत्व संग्रहालय की शान बढ़ाएगी। बुधवार को इस तोप को हैदरगढ़ किले से विदिशा लाया गया। लोहे से बनी यह तोप 10 फीट लंबी, 20 क्विंटल वजनी और 32 इंच चौड़ी है। कुल 275×96 सेमी इसका व्यास है।

जेसीबी मशीन, एक ट्रैक्टर और 20 कर्मचारियों की मदद से करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद इसे किले से बाहर निकाला गया। यह तोप किले में ऊपरी सीढ़ियों में फंसी हुई थी। स्टैंड में फंसाने वाली इस तोप की एक तरफ की खूंटी को चोर चांदी की समझकर उसे काटकर ले गए हैं।

उसी खूंटी की सहायता से तोप को स्टैंड में लगाया जाता था। विदिशा के इतिहास कार गोविंद देवलिया ने बताया कि 17वीं शताब्दी में यहां जागीरदारी प्रथा थी। मोहम्मदगढ़ स्टेट थी। हैदरगढ़ किले से तोप विदिशा लाने का वहां के स्थानीय लोग और नवाब परिवार के लोग विरोध कर रहे थे।

तोप को चोरी करने का प्रयास रहा विफल
जिला पुरातत्व संग्रहालय के गाइड रामनिवास शुक्ला ने बताया कि हैदरगढ़ किले की इस तोप को चुराने का प्रयास भी किया गया लेकिन उसे चोर नहीं ले जा सके। इसलिए तोप की एक तरफ की खूंटी को ही चांदी समझकर काटकर ले गए हैं। इस खूंटी के सहारे ही तोप को स्टैंड पर रखकर चलाया जाता था।

एक साल पहले सर्वे में मिली थी तोप
जिला पुरातत्व विभाग के गाइड रामनिवास शुक्ला ने बताया कि इस संबंध में एक साल पहले सर्वे किया गया था। इस सर्वे में हैदरगढ़ किले के ऊपरी हिस्से में तोप रखे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद करीब 10 महीने से इस तोप को विदिशा लाने का प्रयास किया जा रहा था लेकिन हैदरगढ़ नवाब परिवार के अमर मियां और ग्रामीण जन इस तोप को वहां से विदिशा नहीं लाने दे रहे थे। इसके बाद कलेक्टर कलेक्टर उमाशंकर भार्गव के निर्देश पर ग्यारसपुर एसडीएम तन्मय वर्मा, संग्रहाध्यक्ष केके बरई, प्रभारी नम्रता यादव, हैदरगढ़ की नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी के सहयोग से लोगों को समझाइश देकर इस तोप को वापस लाया गया।

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