भोपाल

पंचायत चुनावः जानिए क्या होता है परिसीमन का मतलब, क्यों है इसकी जरूरत? समझिए आसान भाषा में

पंचायत चुनाव (MP Panchayat Election)की तैयारियों के बीच शिवराज सरकार (Shivraj Government)ने कमलनाथ (Kamalnath) सरकार के समय का परिसीमन निरस्त कर दिया है. सरकार ने मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश 2021 लागू किया है.

भोपाल:  पंचायत चुनाव (MP Panchayat Election)की तैयारियों के बीच शिवराज सरकार (Shivraj Government)ने कमलनाथ (Kamalnath) सरकार के समय का परिसीमन निरस्त कर दिया है. सरकार ने मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश 2021 लागू किया है. इसके बाद जहां पिछले एक साल से चुनाव नहीं हुए ऐसे सभी जिले, जनपद या ग्राम पंचायतों में पुरानी व्यवस्था लागू होगी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि परिसीमन (Delimitation) का मतलब क्या है और इसकी प्रक्रिया क्यों होती है. 

आसान भाषा में समझिए
लोकतंत्र का मतलब है प्रतिनिधित्व सही हो, सभी को समान हक मिले. परिसीमन प्रक्रिया भी इसी आधार पर है. इसके जरिए आबादी का सही प्रतिनिधित्व करने के लिए लोकसभा और विधानसभा सीटों के क्षेत्र को दोबारा से परिभाषित किया जाता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 82 में परिसीमन का उल्लेख है. ये आयोग को काम करने की शक्ति प्रदान करता है. हर 10 साल में एक बार देश की जनगणना होती है उसके बाद परिसीमन किया जाता है. रिपोर्ट की मानें तो लोकसभा का 1971 में और राज्य की विधानसभाओं का 2001 में जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ था. 1952 में परिसीमन होने के बाद 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन किया गया. अब 2026 में सभी राज्यों में परिसीमन प्रक्रिया होगी.इसके मुख्य उदेश्य यहां समझिए.

चुनावी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक तरीके से करने के लिए परिसीमन जरूरी है. हर राज्य और जिले में जनसंख्या में बदलाव होते रहते हैं. इसको देखते हुए समान प्रतिनिधित्व हो इसलिए निर्वाचन क्षेत्र का पुनर्निधारण किया जाता है.

परिसीमन प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा है बढ़ती जनसंख्या के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों का विभाजन करना.  

चुनाव के दौरान ‘आरक्षित सीटों’ की बात करें तो परिसीमन किया जाता है, तब अनुसूचित वर्ग के हितों को ध्यान में रखने के लिए आरक्षित सीटों का भी निर्धारण दोबारा किया जाता है. 

कौन करता है  
देश में परिसीमन का काम ‘परिसीमन आयोग’ करता है, जिसे  ‘सीमा आयोग’ भी कहते हैं.  देश में परिसीमन आयोग का गठन 1952 में किया गया था. 1952 से लेकर 2002 तक सिर्फ 4 बार परिसीमन आयोग का गठन किया गया था. परिसीमन आयोग का गठन निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को तय करने के लिए किया गया था. आयोग का गठन राष्ट्रपति करते हैं.

परिसीमन आयोग का काम करने का तरीका
मुख्य चुनाव आयुक्त परिसीमन आयोग के अध्यक्ष होते हैं और चुनाव आयोग आयुक्त चुनाव के लिए सीटों के लिए सीमा तय करते हैं. यहां बता दें कि परिसीमन आयोग चुनाव क्षेत्र की सीटों की संख्या में बदलाव नहीं कर सकता. उनका काम जनगणना के आधार पर एससी और एसटी सीटों की संख्या आरक्षित करने का होता है.

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