विदिशा

तालाबो, चेकडेमों, स्टॉप डेम का जीर्णोद्धार तथा नवीनीकरण कार्य की कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया

विदिशा :-

जिला पंचायत सीईओ डॉ योगेश भरसट ने जनपदों के सभी सीईओ को पत्र प्रेषित कर कार्यक्षेत्रों में जल संरचनाओं जैसे तालाबो, चेकडेमों, स्टॉप डेम का जीर्णोद्धार तथा नवीनीकरण कार्य की कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया है। जिपं सीईओ ने विभिन्न जल संरचनाओं में जल भण्डारण में वृद्धि हो और उसका उपयोग सिंचाई, मत्स्यपालन, सिंघाडा उत्पादन सहित अन्य स्वरोजगामुंखी कार्यो में किया जा सकें ताकि स्थानीय ग्रामीणजनों की आय में वृद्धि हो सकें।

            जिपं सीईओ डॉ भरसट ने तालाबो, चेकडेम, स्टाप डेम के प्रस्तावित जीर्णोद्धार अथवा नवीनीकरण मूलरूप से महात्मा गांधी नरेगा से कराया जाना सुनिश्चित हों। अन्य शासकीय योजनाओं तथा वित्तीय स्त्रोतो से अभिसरण किया जाएगा। ऐसे कार्यो में स्थानीय ग्रामीणों से अनिवार्य रूप से सहयोग लिया जाए जो संरचनाओं का जीर्णोद्धार अथवा नवीनीकरण होने से जल भण्डारण क्षमता विकसित हो यह स्पष्ट रूप से परलिक्षित हो। सभी स्टीक होल्डर्स में स्पष्ट बोध होना चाहिए।

            संस्थागत व्यवस्था हेतु प्रत्येक ग्राम पंचायत के स्तर पर तकनीकी एवं सलाहकार समिति का गठन कर यह समिति उपयंत्री, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक एवं पटवारी को शामिल किया जाए। मत्स्य उत्पादन के संदर्भ में संरचनाओं के चयन हेतु मत्स्य विभाग के सहायक संचालक से भी ऐसे तालाबो की सूची प्राप्त की जाए जिनका जीर्णोद्धारा अथवा नवीनीकरण किया जाना है। प्रत्येक योजना हेतु पृथक-पृथक जल उपयोगकर्ता समूह गठित किए जाएं। प्रत्येक जल संग्रहण संरचना हेतु अपेक्षित उपयोग के आधार पर एक से अधिक जल उपयोगकर्ता समूह गठित किए जाएं।

            जल उपयोगकर्ता समूहों की क्षमता विकास हेतु उन्हें दायित्व के संबंध में संरचनाओ का रखरखाव, पानी का वितरण, वार्षिक व वाटर आडिट इत्यादि विषयों की भी भलीभांति जानकारी दी जाए। जीर्णद्धार अथवा नवीनीकरण हेतु स्वीकृत कार्य की विस्तृत डीपीआर तैयार कर ग्राम सभा से उसका अनुमोदन प्राप्त किया जाए। प्रत्येक संरचना के लिए अलग-अलग डीपीआर के तीन भाग क्रमशः तकनीकी विवरण, हितग्राहियों तथा परिणामो का विवरण एवं वित्तीय संसाधनो तथा जनभागीदारी का विवरण अनिवार्य रूप से अंकित हो। जल भण्डारण क्षमता का अधिकतम 2/3 भाग जल नीलामी अथवा वार्षिक रूप से तय किए गए उपयोगकर्ता समूह के बीच पानी का वितरण किया जाए। किसी जल उपयोगर्ता समूह द्वारा उपयोग की सीमा तीन से पांच वर्ष होगी इसके बाद उपयोगकर्ता प्रभार का पुनः निर्धारण किया जा सकेगा। किसी अन्य समूह को भी केवल मत्स्य उत्पादन से संबंद्ध किया जा सकेगा

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