भोपाल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया फिल्म “उलगुलान-एक क्रांति” का डिजिटल रिलीज

भगवान बिरसा मुंडा ने की थी उलगुलान क्रांति की घोषणा
बिरसा मुंडा द्वारा भारत की आजादी, जनजातीय धर्म, संस्कृति और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष पर केन्द्रित है फिल्म

भोपाल : 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज “उलगुलान-एक क्रांति” फीचर फिल्म को डिजिटली रिलीज किया। मुख्यमंत्री द्वारा जनसंपर्क विभाग के पोर्टल पर डिजिटली रिलीज किया गया। निवास पर आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध अभिनेता श्री नितीश भारद्वाज, फिल्म के निर्माता, निर्देशक अशोक शरण, आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाडे़ उपस्थित थे। अशोक शरण ने जनजातीय जीवन पर लगभग 200 लघु फिल्मों का निर्माण किया है।

यह फिल्म भगवान बिरसा मुंडा के कर्म क्षेत्र खूंटी,झारखंड में शूट की गई है। मध्य प्रदेश पहला राज्य है, जो इस फिल्म को डिजिटली रिलीज कर रहा है। फिल्म के लेखक पद्म भूषण एवं पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा हैं। भारत की जनजातियों के लिए यह सम्मान की बात होगी कि वह इस फिल्म के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा के जीवन को देख और समझ सकेंगे। उल्लेखनीय है कि 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा का जन्म दिवस पिछले वर्ष से प्रदेश में जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है ।

फिल्म के निर्माता-निर्देशक अशोक शरण ने बताया कि बिरसा मुंडा ने 24-25 दिसंबर 1898 को पहले उलगुलान यानि क्रान्ति की घोषणा की थी। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित फीचर फिल्म “उलगुलान-एक क्रान्ति” 35 एमएम सिनेमा स्कोप डॉल्बी डिजिटल साउंड में बनी है। फिल्म बॉलीवुड के प्रसिद्ध कलाकारों को लेकर बनाई गई है।

अशोक शरण ने बताया कि बिरसा मुंडा का जन्म वर्ष 1875 में झारखंड के उलिहतू, खूंटी में हुआ था। बिरसा मुंडा ने भारत की आज़ादी और जनजातीय धर्म, संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी थी। 9 जनवरी 1899 को उनके नेतृत्व में सयिलरकब, खूंटी के पहाड़ों पर अंग्रेज़ों के साथ लड़ाई हुई थी। उसके बाद बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करने के लिए उस वक्त 500 रूपए का ईनाम रखा गया। पैसे के लोभ में वहीं के सात लोगों ने जंगल में सोते हुए बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर अंग्रेजों के हवाले कर दिया। 9 जून 1900 को इनकी मृत्यु राँची केंद्रीय कारागृह में अंग्रेज़ों द्वारा ज़हर देने से हो गई। बिरसा मुंडा 25 वर्ष की आयु भी पूरी नहीं कर पाए। बिरसा मुंडा के त्याग और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के संकल्प के परिणामस्वरूप उन्हें बिरसा भगवान माना गया।

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